
पुश्तैनी भूमि का सीमाज्ञान कराना है तो जमा कराओ 40 हजार
अजमेर. नागौर जिले की मेड़ता तहसील के ग्राम आकेली निवासी पांचाराम अपनी पुश्तैनी भूमि के सीमाज्ञान व कब्जा दिलवाने की मांग को लेकर गत दो साल से सरकारी दफ्तरों व मुख्यमंत्री कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर है। यहां तक कि उसे अपनी 80 वर्षीय मां को भी अधिकारियों के समक्ष ले जाकर व्यथा सुनानी पड़ी। अफसरों के दफ्तरों में बार-बार चक्कर लगाने के बाद परिणाम यह हुआ कि उसे नए नियमों का हवाला देते हुए मात्र 7.09 रकबा को मापने के लिए 40 हजार रुपए जमा कराने का पत्र थमा दिया गया।
भूमि का सीमाज्ञान व कब्जा भूल अब वह 40 हजार रुपए की जुगत में लग गया है। उसका कहना है कि प्रशासन शहरों के संग शिविर में सीमाज्ञान नि:शुल्क कराने का दावा सरकार की ओर से किया गया, लेकिन उसे नियमों के तहत मशीन से मेपिंग कराने के लिए भारी भरकम राशि जमा कराने को कहा गया है।
राजस्थान पत्रिका से पीड़ा जताते हुए पांचाराम भावुक हो गया। उसका कहना है कि उसके गांव के जनप्रतिनि धियों के कथित दबाव में अधिकारी उसकी जीरे की फसल बर्बाद करने व उसकी भूमि को रास्ते के नाम पर कब्जा करने की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे।
तहसीलदार भू-अभिलेख मेड़ता कार्यालय की ओर से उसे गत 21 जून को एक पत्र देकर मशीन से सीमाज्ञान के लिए 40 हजार रुपए शुल्क जमा कराने को कहा गया है। भू-प्रबंध अधिकारी अजमेर से सीमाज्ञान के आदेश के बाद उसे शुल्क जमा कराने का पत्र थमा दिया।
पांचाराम ने बताया कि वह राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री, पंचायतीराज मंत्री, मुख्य सचिव लोकायुक्त, एसीबी के महानिदेशक, संभागीय आयुक्त व पुलिस महानिदेशक तक को पीड़ा जता चुका है।
जीरा बना जीव का बैरी...
पांचाराम ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत व तहसीलदार उसके साथ द्वेषतापूर्ण कार्रवाई कर रहे हैं। पांचाराम व उसकी माता शायरी देवी ने तहसीलदार व एसडीएम नागौर में प्रार्थना पत्र पेश किए, लेकिन 16 मार्च को बिना नाप-जोख के उसकी खातेदारी की जमीन खेत की बाड़ तोड़कर जीरे की फसल चौपट कर दी।तीन बीघा जमीन व 10 हरे पे़ड़ उखाड़ दिए, जबकि सरकार ने बजट में नि: शुल्क सीमाज्ञान कराने का ऐलान किया है।
Published on:
29 Jun 2023 10:45 pm
बड़ी खबरें
View Allअजमेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
