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राजस्थान का ये कुख्यात अपराधी जेल से चलाता था ‘D’ गैंग

जेल में रहने के दौरान उसने 'डी गैंग (गिरोह) भी बनाया। गिरोह सुपारी लेकर विवादित सम्पतियों के कब्जे खाली करवाने और चौथ वसूली का काम।
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अजमेर

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Manish Singh

Apr 18, 2019

infamous criminal of Rajasthan was driven from jail by the 'D' gang

राजस्थान का ये कुख्यात अपराधी जेल से चलाता था 'D' गैंग गैंग

प्रदेश की जेलों से चलाई था 'डीÓ गैंग

पीडि़त रह चुका है धनसिंह का गुर्गा, धनसिंह के इशारे पर करवाते थे विवादित जमीनों को खाली, करते थे वसूली का काम

अजमेर. राजस्थान पुलिस के कुख्यात वांछित अपराधियों में शुमार धनसिंह ने तेरह साल जेल में गुजारे हैं। वह अजमेर, जयपुर सहित प्रदेश की कई जेल में रह चुका है। जेल में रहने के दौरान उसने 'डीÓ गैंग (गिरोह) भी बनाया।गिरोह के लोग सुपारी लेकर विवादित सम्पतियों के कब्जे खाली करवाने और चौथ वसूली का काम करती थी। यह खुलासा पीडि़त नगर निवासी सुरेन्द्रसिंह ने पुलिस को दिए बयान में किया है। सुरेन्द्र भी किसी समय डी गैंग में धनसिंह के लिए वसूली का काम करता था।

बिजयनगर थाना पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि जेल में बैठे-बैठे धन सिंह अजमेर, जयपुर समेत प्रदेशभर में विवादित सम्पतियों को खाली कराने की सुपारी लेता था। इसके बाद जेल के बाहर अपनी गैंग के जरिए भूखंडों और विवादित सम्पत्तियों को खाली करवाने का काम करता था।

सुरेन्द्र था खजांची

पुलिस के मुताबिक डी गैंग के काम का पैसा सुरेन्द्रसिंह वसूलता था। उसको धनसिंह ने डी गैंग में खजांची का काम दे रखा था। धन सिंह के जेल में रहते हुए सुरेन्द्र सिंह ही विवादित सम्पत्तियों के कब्जे खाली कराने व अन्य कामकाज का लेनदेन करता था। धन सिंह ने जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद सुरेन्द्र से वसूले गए रुपए मांगे तो उसने नहीं दिए। इसके बाद धन सिंह ने पहले सुरेन्द्र को मोबाइल पर धमकाया फिर 20 अक्टूबर को रात 12 बजे उसके घर जाकर हवाई फायर कर जान से मारने की धमकी दी।

...तुझे नहीं छोड़ूंगा

सुरेन्द्र ने शिकायत में बताया कि धनसिंह ने 20 अक्टूबर को रात 9 बजे किए कॉल में उसको खुलेआम धमकी देते हुए कहा कि 'मैं धनसिंह डकैत पीपरोली बोल रहा हूं। तुझे जान से मार दूंगा। पहले तो बिजयनगर में मैने खुलेआम फायरिंग की है। अब तुझे बचना है तो पुलिस लगा लेना सुरक्षा के लिए। मैं तुझे नहीं छोडू़ंगा।Ó

बैरक में मिला था हथियार

धनसिंह की पहुंच का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि 2011 में अजमेर सेन्ट्रल जेल में रहते हुए धनसिंह ने हथियार व असला भीतर मंगवा लिया। गनीमत रही कि तत्कालीन सहायक पुलिस अधीक्षक अजय सिंह को मुखबिर से मिली सूचना के बाद जिला पुलिस ने कार्रवाई करते हुए धनसिंह की बैरक से पिस्टल व जिन्दा कारतूस बरामद किए थे।