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अजमेर
video: गरीबी में भी खुद्दारी एेसी  – ये मासूम बच्चियां खुद शिक्षा से दूर लेकिन झोपड़ी में ही चूल्हा फूंक खुद पकाती हैं मिड डे मील
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video: गरीबी में भी खुद्दारी एेसी – ये मासूम बच्चियां खुद शिक्षा से दूर लेकिन झोपड़ी में ही चूल्हा फूंक खुद पकाती हैं मिड डे मील

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चन्द्रप्रकाश जोशी/अजमेर. किसी को अगर घोर गरीबी में भी खुद्दारी का जुनून देखना हो तो पुष्कर रोड विश्राम स्थली के पास सड़क किनारे डेरा डाले खानाबदोश परिवार की दो मासूम बालिकाओं को चूल्हा फूंककर अपने और अपने परिवार के लिए खाना बनाते देखा जा सकता है। उनकी मां हिदायत देकर गई कि तुम पेट (खाने) की खातिर किसी के सामने हाथ मत फैलाना, भले ही थोड़ी मेहनत करनी पड़े। वहीं बेयिों ने मां को आश्वस्त किया आप काम पर जाओ, आपके लिए खाना हम तैयार कर लेंगी। उसके बाद शिक्षा से वंचित ये मासूम बालिकाएं अपनी झुग्गी में ही पत्थरों को जोड़ चूल्हा बना कांटें जलाकर रोटियां सेकने में जुट गईं।

 

 

 

 

innocent poor girls making mid day meal for family

कचरा बीन कर, घासफूस और कागज के घोड़े बना इन्हें बेचकर परिवार का पालन-पोषण करने वाले कई परिवार आज भी बच्चों को शिक्षा नहीं दिला पा रहे हैं। शहर में सड़कों के किनारे, तिरपाल की झुग्गी बनाकर अपने बच्चों को सर्दी, गर्मी एवं बरसात में पाल रहे हैं।गरीबी के चलते सुबह-शाम चूल्हा जलाने की चिंता करने वाले इन परिवारों में शिक्षा कोसों दूर है। न तो सरकारी स्कूलों में इनका प्रवेश करवाया जाता है न पढ़ाने का भाव मन में जागृत होता है। बेटी होने पर तो पढ़ाने की कल्पना भी नहीं की जाती है।

 

पुष्कर रोड विश्राम स्थली के पास आज भी कई परिवार डेरा जमाए हुए हैं। इनमें कुछ परिवार घास-फूस व कागज के रंग-बिरंगे घोड़े बनाकर बनाकर बेचते हैं तो कुछ कचरा/ प्लास्टिक आदि बीनते हैं और कबाड़ में बेचकर दाल-रोटी का बंदोबस्त करते हैं।

innocent poor girls making mid day meal for family

‘हम पढ़ाई करने नहीं जातीं

झोपड़ी के पास रविवार को चूल्हा जलाकर दो मासूम बच्चियां अपने परिवार के लिए खाना पका रही थी। इनमें बड़ी कशिश (12) आटा लगाने के साथ सब्जी आदि तैयार कर रही थी। वहीं छोटी पायल (10) लोहे के पाइप (फूंकनी) से चूल्हा फूंक रही थी। पायल ने चावल भी बनाए। जब बच्चियों से बात की तो बताया मां कमाने गई हैं। सुबह से मां भूखी है, उनके लिए और सभी के लिए खाना बना रहे हैं। जब पढ़ाई की बात की तो उनका सिर नीचे झुक गया। बोलीं- पढ़ाई करने नहीं जाती हैं।


सरकारी योजनाएं दूर हैं गरीबों से

इन जरूरतमंद परिवारों से सरकारी योजनाएं कोसों दूर हैं। शहर में रहने के बावजूद गैस कनेक्शन तो दूर केरोसिन तक नसीब नहीं होता है। यहां न उज्ज्वला गैस कनेक्शन हैं, न सार्वजनिक शौचालय और न मिड डे मील। ये बच्चियां अपने लिए खुद हीं पोषाहार तैयार करती हैं।