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…ताकि जम्मू-कश्मीर के बच्चों पर हो संस्कृति का असर

कुपवाड़ा से आया 20 बच्चों का दल आया अजमेर,राजस्थान के अन्य शहरों में जाएंगे बच्चे,अलगाववाद से दूर रखने के प्रयास,धारा 370 हटने के बाद बदली परिस्थितियां
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...ताकि जम्मू-कश्मीर के बच्चों पर हो संस्कृति का असर

चादर पेश कर अमन चैन की दुआ मांगी

अजमेर. भारतीय सेना की चिनार कॉप्र्स के हमदर्द ए कुपवाड़ा अभियान की योजना है कि जम्मू-कश्मीर के बच्चों पर अलगाववाद की छाया नहीं पड़े। भारत की संस्कृति को जाने और रच-बस जाएं। धारा 370 हटने के बाद यहां के बच्चे भारत को अपना मुल्क माने।

प्राचीन इमारतों, महापुरुषों, परम्पराओं व रीति-रिवाज से रूबरू हों। इसी को लेकर सेना जम्मू-कश्मीर के बच्चों को भारत भ्रमण करा रही है। गुरुवार को कुपवाड़ा जिले क़े शिक्षकों और 20 स्कूली बच्चों का दल राजस्थान सहित अन्य राज्यों के भ्रमण पर निकला है। यह दल गरीब नवाज की दरगाह भी पहुंचा। विद्यार्थियों ने सूफी संत की मजार शरीफ पर चादर पेश की।

उन्होंने अकबरी मस्जिद, शाहजहांनी मस्जिद, क्वीन मेरी हौज, महफिल खाना, मुगलकालीन देग, कव्वाली परम्परा सहित अन्य के बारे में जानकारी ली।

दरगाह में हाजिरी

जम्मू-कश्मीर के स्कूली बच्चों ने सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में हाजिरी दी। इस दौरान दरगाह की इमारतों, विभिन्न रसूमात और सूफियत के बारे में जानकारी ली। मजार शरीफ पर मखमली और गुलाब के फूलों की चादर पेश कर अमन चैन की दुआ मांगी।

गरीब नवाज की दरगाह देश-दुनिया में मशहूर

शिक्षकों ने बताया कि हमदर्द ए कुपवाड़ा अभियान का उ²ेश्य बच्चों को देश के विभिन्न प्रांतों की भाषा, संस्कृति, खान-पान और धार्मिक स्थानों से रूबरू कराना है। गरीब नवाज की दरगाह देश-दुनिया में मशहूर है। बच्चों ने इसकी जियारत की है। बच्चों ने बताया कि वे चाहते हैं, कि राजस्थान और अन्य प्रांतों के विद्यार्थी भी कश्मीर आकर वहां की संस्कृति, भाषा और खान-पान को समझें। यह अभियान दस दिवसीय है। विद्यार्थी कुपवाड़ा के विभिन्न स्कूल में अध्ययनरत हैं।

जम्मू-कश्मीर के स्कूली बच्चों ने सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में हाजिरी