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Happy bithday rajasthan: जानें राजपुताना से कैसे बना राजस्थान, कण-कण में गूंजती है वीर सपूतों के बलिदान की कहानियां

राजस्थान शब्द का प्रयोग राजस्थान निर्माण के पहले से ही होता रहा है।

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journey of modern rajasthan

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दिलीप शर्मा/अजमेर।

आज का राजस्थान 30 मार्च 1956 से अस्तित्व में आया। इससे पूर्व इसे राजपूताना भी कहा जाता था। अरावनी परवत माला से घिरा यह भू भाग रण बांकुरे व वीरों की धरती रही है। रियासतों के विलीनीकरण से पूर्व यह क्षेत्र दर्जनों रियासतों में विभाजित था। यहां विभिन्न रियासतों की अपनी स्वतंत्र सत्ता, अपने कानून, अपने फरमान, डाक प्रणाली, मुद्रा आदि होती थी जिससे कानून प्रशासन व व्यवस्था भी अलग अलग तरह से होती थी। यहां तक अजमेर भी एक अलग राज्य था यहां अपनी विधानसभा, मंत्री मंडल व हाईकोर्ट थी।

राजस्थान शब्द पहले से ही प्रचलित था

राजस्थान शब्द का प्रयोग राजस्थान निर्माण के पहले से ही होता रहा है। अजमेर मेरवाड़ा क्षेत्र के पीसांगन ठिकाणा प्रशासन ने अपने राजकाज, सरकारी रिकार्ड, राजकोष, राजस्व रिकार्ड में राजस्थान शब्द का इस्तेमाल किए जाने के भी प्रमाण है।

केन्द्र शासित प्रदेश था अजमेर

इससे भी पहले के दस्तावेज देखें तो अजमेर केन्द्र शासित प्रदेश के रूप में सीधे ब्रिटिश राज के तहत आता था और यहां वायसराय का प्रतिनिधि चीफ कमिश्नर होता था जो वर्तमान में राज्यपाल का पद होता है। अजमेर राज्य सबसे आखिर में राज्य में विलय हुआ। इसके साथ ही प्रदेश का राजनीतिक पुनर्गठन कार्य पूर्ण हुआ।

कर्नल टॉड ने लिखा था राजपुताने का इतिहास
कर्नल जेम्स टॉड ने प्रदेश के भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक सर्वेक्षण कर राजपूताने का इतिहास लिखा। जिससे तत्कालीन रियासतों के दौर को लोक जीवन शासन व्यवस्था, आर्थिक व भौगोलिक स्थिति का वृतांत लिपिबद्ध किया गया।

विरासत के इतिहास को रखने का जुनून

भारतीय जीवन बीमा निगम में प्रशासनिक अधिकारी बी. एल. सामरा को विरासत के इतिहास को संजोकर रखने का जुनून है। उनके पास राजपूताना इतिहास की रियासतों के स्टांप पेपर, दस्तावेज उपलब्ध है। मेवाड़, मारवाड़, जोधपुर , बीकानेर , जैसलमेर , जयपुर , करौली, खेतड़ी, शाहपुरा, किशनगढ़, राजगढ़, झुंझूनू, डूंगरपुर, बांसवाड़, झालावाड़, टोंक आदि रियासतों के कई दस्तावेज उपलब्ध हैं।

कर्नल टॉड की जयंती पर किया सामरा को सम्मानित

टॉडगढ़ स्थित प्रज्ञा शिखर पर भारतीय इतिहास संकलन समिति व साहित्य संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में कर्नल टॉड की जयंती इतिहास अवलोकन दिवस के रूप में मनायी गई। इस मौके पर बीएल सामरा को मेवाड़ी टोपी पहना कर अभिनंदन किया।