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Rajasthan Expressway: कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे का विरोध, किसानों की अलाइमेंट निरस्त करने की मांग

Kotputli-Kishangarh Greenfield Expressway: प्रस्तावित कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे के विरोध में नया गांव सहित आस पास के ग्रामीणों और किसानों ने सोमवार को विरोध दर्ज कराया। किसानों ने प्राधिकृत अधिकारी (भूमि अवाप्ति) एवं उपखंड अधिकारी किशनगढ़ को ज्ञापन सौंपकर एक्सप्रेस वे निर्माण पर असहमति जताई और नए अलाइनमेंट को निरस्त करने की मांग की।

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kishangarh expressway protest (1)

उपखंड अधिकारी कार्यालय परिसर में धरना देकर प्रदर्शन करते नया गांव के किसान व ग्रामीण। फोटो पत्रिका

kishangarh Expressway protest : मदनगंज-किशनगढ़ (अजमेर)। प्रस्तावित कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे के विरोध में नया गांव सहित आस पास के ग्रामीणों और किसानों ने सोमवार को विरोध दर्ज कराया। किसानों ने प्राधिकृत अधिकारी (भूमि अवाप्ति) एवं उपखंड अधिकारी किशनगढ़ को ज्ञापन सौंपकर एक्सप्रेस वे निर्माण पर असहमति जताई और नए अलाइनमेंट को निरस्त करने की मांग की।

ग्रामीणों और किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि प्रस्तावित कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे किसानों, काश्तकारों और ग्रामीणों के लिए पूरी तरह अनुपयोगी और विनाशकारी साबित होगा । इससे हजारों किसानों की कृषि भूमि, सिंचाई साधन, कुएं, ट्यूबवेल, चरागाह, वन क्षेत्र और पशुपालन जैसे आजीविका के साधन प्रभावित होंगे।

दो हिस्सों में विभाजित हो जाएगी जमीन

साथ ही मनरेगा के तहत कराए गए तालाब, नाड़ी, रपट और जल संरक्षण कार्य भी नष्ट हो जाएंगे । ज्ञापन में किसानों ने बताया कि अधिकांश प्रभावित परिवार लघु एवं सीमांत किसान हैं। ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे बनने से उनकी जमीन छोटे-छोटे हिस्सों में बंट जाएगी, रास्ते बंद हो जाएंगे और कई किसानों की भूमि दो हिस्सों में विभाजित हो जाएगी। इससे उनके सामाजिक, आर्थिक और मानसिक जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

किसानों और ग्रामीणों ने उठाया यह सवाल

किसानों और ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि जब किशनगढ़ से जयपुर तक पहले से एनएच-48 छह लेन सड़क के रूप में मौजूद है और उसके उन्नयन के लिए हाल ही में 910 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं, तो फिर नई ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे की आवश्यकता क्या है । किसानों का कहना है कि हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि और करीब 10 हजार हरे पेड़ों की कटाई पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बनेगी।

पूर्व प्रस्तावित अलाइनमेंट को ही यथावत रखने की मांग

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि पहले प्रस्तावित अलाइनमेंट की पूरी मैपिंग, खसरा निर्धारण और पंचायत स्तर तक सूची जारी होने के बाद अचानक अलाइनमेंट बदल दिया गया । किसानों ने इसकी निष्पक्ष जांच कराने और पूर्व प्रस्तावित अलाइनमेंट को ही यथावत रखने की मांग की है।

साथ ही अलाइनमेंट परिवर्तन में मिलीभगत के आरोपों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई। ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि वे अपनी जमीन बचाने के लिए अंतिम समय तक संघर्ष करेंगे । ज्ञापन देने वालों में किशनलाल, गणेश कुमावत समेत नया गांव के ग्रामीण व किसान शामिल रहे।