
अजमेर विश्वविद्यालय (फोटो-पत्रिका)
अजमेर। पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा बचत और बढ़ते ईंधन संकट को देखते हुए महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय (एमडीएसयू) प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्वविद्यालय परिसर में पेट्रोल और डीजल चालित वाहनों के उपयोग को सीमित करने का निर्णय लिया गया है। अब परिसर में अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और आगंतुकों को ई-ऑटो रिक्शा, बैटरी चालित वाहनों या पैदल आवागमन के लिए प्रेरित किया जाएगा।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल के निर्देशानुसार जारी आदेश में कहा गया है कि यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और ईंधन की खपत कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। यह पहल राज्यपाल एवं कुलाधिपति के निर्देशों के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार की ऊर्जा संरक्षण संबंधी नीतियों के अनुरूप मानी जा रही है।
होर्मुज स्ट्रेट में चल रहे तनाव की वजह से दुनियाभर में तेल का संकट गहरा गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि वर्तमान समय में ऊर्जा संरक्षण केवल सरकारी नीति नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी बन चुकी है। ऊर्जा संसाधनों पर बढ़ते दबाव, ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच ऐसे कदम भविष्य के लिए आवश्यक माने जा रहे हैं। जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण जैसी वैश्विक समस्याओं के बीच संस्थानों की भूमिका भी पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हाल में वैश्विक तेल सकंट को लेकर देश के नागरिकों से पेट्रोल-डीजल की बचत करने की अपील की है। पीएम ने आम नागरिकों से विदेश यात्रा नहीं करने, एक साल तक सोना नहीं खरीदने और पेट्रोल-डीजल वाहनों का कम उपयोग करने की अपील की है। पीएम ने कहा कि हम छोटी-छोटी आदतों के जरिए देश की सेवा कर सकते हैं। ईंधन की बचत और वैकल्पिक ऊर्जा साधनों को अपनाना भी इसी सोच का हिस्सा माना जा रहा है।
विश्वविद्यालय परिसर में पहले से संचालित ई-ऑटो रिक्शा सेवाओं को इस निर्णय के बाद और अधिक व्यवस्थित किया जाएगा। प्रशासन ने ई-ऑटो संचालकों को निर्धारित स्थानों पर वाहन खड़े करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सुरक्षा कर्मियों और गार्ड्स को आदेश की सख्ती से पालना सुनिश्चित कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन को उम्मीद है कि यह कदम न केवल परिसर में प्रदूषण कम करेगा बल्कि विद्यार्थियों और कर्मचारियों के बीच पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगा।
Updated on:
18 May 2026, 5:16 PM IST
Published on:
18 May 2026, 5:04 PM IST
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