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अजमेर की बेटी का कमाल : काठमांडु में बजाया जीत का डंका , ट्रेकिंग से अकेले तय की 17 हजार फिट की दूरी

हाल ही में रिलीज संजू फिल्म का गाना ' कर हर मैदान फतह को चरितार्थ करते हुए अजमेर की एक बेटी ने अदम्य साहस और जबरदस्त इच्छाशक्ति की मिसाल पेश की

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kushagrta trekking on kathmandu's hilly area

अजमेर की बेटी का कमाल : काठमांडु में बजाया जीत का डंका , ट्रेकिंग से अकेले तय की 17 हजार फिट की दूरी

सोनम राणावत /अजमेर. हाल ही में रिलीज संजू फिल्म का गाना ' कर हर मैदान फतह को चरितार्थ करते हुए अजमेर की एक बेटी ने अदम्य साहस और जबरदस्त इच्छाशक्ति की मिसाल पेश की है। रेगिस्तानी मैदानों में पढ़ी और पली कुशाग्रता ने काठमाण्डू की आसमां छूती दुर्गम और जोखिमपूर्ण पहाडिय़ों पर परचम फैलाकर साबित कर दिखाया कि बेटियां भी किसी से कम नहीं हैं।

अजमेर की बेटी कुशाग्रता ने पन्द्रह दिन में काठमाण्डू व उसके आस-पास की दुर्गम पहाडिय़ों पर ट्रेकिंग कर सत्रह हजार फीट से अधिक की उंचाई तय कर यह बता दिया है कि अब इस तरह के एडवेंचर करने में अब बेटियां भी बेटों से कम नहीं हैं।

अजमेर की लाडो ने किया कमाल- कुशाग्रता ने अजमेर की सेंट मैरीज कॉन्वेन्ट से बारहवीं पास कर जयपुर से बी-टेक की पढ़ाई कर अभी गुडग़ांव में जॉब कर रही हैं। उन्होंने बताया कि हमेशा से कुछ अलग करने के जुनून के चलते ट्रेकिंग को चुना। इसके साथ ही उन्होनें बताया कि परिवार में और कोई ट्रेकिंग का शौक नहीं रखता इसलिए मुझे अकेले ही अपने सफर तक पहुंचना पड़ता है।

अस्वस्थ होने के बावजूद भी नहीं मानी हार- कुशाग्रता ने बताया कि ट्रेकिंग के लिए वे यहां से काठमाण्डू पहुंची जहां उंचाई पर चढऩे के दौरान साइनस की परेशानी के कारण कई बार उनकी तबियत नाजुक हुई लेकिन इसके बावजूद भी लक्ष्य को पूरा करने की चाह उन्हें मन्जिल तक ले गई। तथा अपने चार अन्य साथियों के साथ मिलकर ट्रेकिंग कर 1700 फीट की उंचाई को पूरा किया।

भारत में भी कर चुकी हैं ट्रेकिंग - उन्होंने बताया कि इससे पहले भी वे उत्ताखण्ड, हिमाचल व कई अन्य जगहों पर भी ट्रेकिंग कर चुकी हैं, जिससे ट्रेकिंग का काफी अनुभव हो गया। अब जब भी मुझे ऑफिस से छुट्टी मिलती है तो मैं अपना सामान पैक कर ट्रेकिंग के लिए निकल जाती हूं। पहली बार जब ट्रेकिंग की तो काफी डर लग रहा था। लेकिन अब आदत सी हो गई है।

परिवार व पति के सहयोग से पाया मुकाम- कुशाग्रता ने बताया कि मेरे परिवार व पति के सहयोग से मैं इतनी दूर तक जा पाती हूं, वरना मेरे लिए ट्रेकिंग करना असम्भव होता । क्यों कि इसके लिए मुझे कई दिनों तक घर से दूर रहकर यह सफर तय करना पड़ता है।

माता पिता करें बच्चों के सपने साकार- कई बार देखा जाता है कि माता पिता बच्चों पर अपनी इच्छा थोपते हैं ,ऐसे में बच्चे इस तरह के एडवेंचर करने से वंचित रह जाते हैं। इसलिए सभी माता पिता को चाहिए कि बच्चों की रूचि को ध्यान में रखकर उनके सपनों को साकार करें, बेटा हो या बेटी आज सब एक समान हैं ।