5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

कोरोना में पिसती जिंदगियां,अजमेर में कई जगह फंसे हैं दूसरे प्रदेशों के लोग

तीन अलग-अलग जगहों पर लोग खाने को भी तरसे भामाशाहों ने की मदद तो मिली राहत मजदूरों की व्यथा कैसे जाएं घर कोरोना का कहर
2 min read
Google source verification
ajmer

ajmer

भूपेन्द्र सिंह

अजमेर. कोरोना corona के कहर से यूं तो पूरी दुनिया कांप रही है, लेकिन बीमारी से इतर अजमेर में फंसे तीन समूहों को अगर चिंता है तो दो वक्त की रोटी और सुरक्षित घर पर पहुंचने की। हालांकि, मौत का खौफ आंखों में साफ दिखाई देता है। अब चाहे वो बीमारी से आए या भूख से। लॉकडाउन के चलते शहर में फंसे अन्य राज्यों के मजदूरों के सामने पेट भरने का संकट है। कई जगहों पर तो मजदूरों व अन्य ने आवागमन के साधान नहीं होने पर पैदल ही पलायन शुरू कर दिया है। वे अपने घर जाने के लिए सैकड़ों किलोमीटर का सफर भूखे-प्यासे ही तय कर रहे हैं।

केस १
अजमेर में मजदूरी करने आए एक परिवार ने सूचना केन्द्र में शरण ली है। परिवार में ९ लोग हैं, इनमें २ छोटे बच्चे भी हैं। काम बंद है तो परिवार दिनभर सिर्फ बैठा रहता है। ठेकेदार के आदमी आते हैं और खाना मिल जाता है। कल क्या होगा? ये नहीं जानते। परिवार के मुखिया मांगू का कहना है कि बच्चों को लेकर घर कैसे जाएं, समझ नहीं आ रहा। कुछ लोग कर रहे हैं कि दो महीने बाद काम शुरू होगा, तब तक क्या करेंगे?

केस २
कलक्ट्रेट में एक परिवार अतिरिक्त कलक्टर कार्यालय के बाहर इस आस में बैठा है कि उन्हें घर जाने के लिए अनुमति पत्र मिल जाए। न तो उनके पास वाहन है और न ही पैसे। गीता देवी ने बताया कि वह भोपाल से दरगाह में मन्नत मांगने तथा बेटी की बीमारी से मुक्ति के लिए आई थी। लॉकडाउन हुआ यहीं फंस गए। रुपए भी खत्म हो गए हैं। यहां तक कि दुधमुंही बच्ची के दूध के भी लाले है। न सिर छुपाने का ठिकाना है और न खाने की कोई व्यवस्था।

केस ३
पचास लोगों का समूह बिहार से अजमेर मछली पकडऩे आया है। लॉकडाउन हो जाने के बाद से ही काम बंद है। इनके पास का सारा राशन अब खत्म हो चुका है। समस्या एक नहीं अनेक हैंं। समूह के लोग अब आनासागर झील के पास स्थित एक मकान में पनाह लिए हुए हैं। इनके प्रतिदिन के भोजन की व्यवस्था प्रशासन और भामाशाह-दानदाताओं की मदद से जैसे-तैसे हो जा रही है।

यहां जमावड़ा
कलक्ट्रेट के पीछे, पुरानी आरपीएससी तिराहे, मेडिकल कॉलेज के पास, बजरंगगढ़, अग्रवाल स्कूल के पास, दरगाह क्षेत्र आदि जगहों पर बेसहारा लोग सडक़ों पर डेरा डाले हैं। कई भामाशाह, स्वयं सेवी संस्था तथा सरकार की और से इन्हें खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाई जा रही है।

read more:96 लाख के पोल गायब, 14 अफसर जांच के घेरे में