
garib nawaz urs 2019
अजमेर.
ख्वाजा गरीब नवाज के उर्स में बड़ी संख्या में जायरीन आ रहे हैं। महिलाओं, बुजुर्गों के साथ बच्चे भी शामिल रहते हैं। ख्वाजा के दर तक पहुंचने एवं ठहराव गंतव्य स्थल के मध्य कई बार बच्चे, परिजन बिछुड़ जाते हैं। कई बार को महीनों पूर्व से अपनों बिछुड़े भी ख्वाजा के दर पर मिल जाते हैं। इन बिछुड़ों को अपनों से मिलाने के लिए कई लोग, स्वयंसेवक एवं सरकारी कर्मचारी सेवाएं देते हैं। उर्स में बच्चों से ज्यादा बड़े अपनों से बिछड़ रहे हैं। हालांकि मोबाइल के चलते उर्स में बीते कुछ वर्षों में अपनों से बिछडऩे वालों की संख्या में कमी आई है।
पहुंचते ढूंढते-ढूंढते बुलंद दरवाजे पर
ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती उर्स में रोज करीब 300 से 500 से ज्यादा लोग भीड़ में अपनों से बिछुड़ जाते हैं। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती है। बिछडऩे वालों की संख्या भी बढ़ती जाती है। यह एक हजार तक भी पहुंच जाती है। परिजनों के नहीं मिलने पर वह उन्हें ढूंढते-ढूंढते बुलंद दरवाजे पर पहुंचते हैं। यहां पूछताछ काउंटर पर अपनी पहचान बताकर माइक से घोषणा करवाते हैं।
संपर्क भी नहीं कर पाते
यह घोषणाएं कई लाउडस्पीकर के माध्यम से मदार गेट, गंज, तारागढ़ जाने वाले रास्ते सहित अन्य हिस्सों तक सुनाई देती है। इस दौरान किसी के परिजन कुछ ही देर में उन्हें मिल जाते हैं, तो किसी को घंटों लग जाते हैंं। बड़ों के बिछडऩे के मामले इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि जियारत के दौरान वे कई स्थानों पर रुक जाते हैं। इसके चलते अपने दल से बिछुड़ जाते हैं। मोबाइल नहीं होने के कारण परिजन उनसे संपर्क भी नहीं कर पाते हैं।
बिछुडऩे के मामले हुए कम
सैयद शादाब हुसैन ने बताया कि पहले जब मोबाइल का प्रचलन कम था तब रोज करीब 800 घोषणाएं की जाती थी। लेकिन अब यह संख्या घटकर 300 से 500 हो गई है। क्योंकि लोग मोबाइल पर संपर्क करके भी सूचना ले लेते हैं। हालांकि अब मोबाइल खोने के भी कई मामले सामने आते हैं।
Published on:
14 Mar 2019, 6:33 AM IST
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