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Mahatma Gandhi Death Anniversary: अजमेर यात्रा में किया था बापू ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन का ऐलान

Mahatma Gandhi Death Anniversary 2024: अजमेर यात्रा में किया था बापू ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन का ऐलान महात्मा गांधी की पुण्यतिथि मंगलवार को संपूर्ण देश में श्रद्धा से मनाई जाएगी।

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अजमेर

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Kirti Verma

Jan 30, 2024

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Mahatma Gandhi Death Anniversary 2024: अजमेर यात्रा में किया था बापू ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन का ऐलान महात्मा गांधी की पुण्यतिथि मंगलवार को संपूर्ण देश में श्रद्धा से मनाई जाएगी। महात्मा गांधी के अजमेर से जुड़े कुछ प्रसंग उनके ही अखबार नवजीवन में प्रकाशित किए गए थे। ऐसे ही एक अखबार की प्रति अजमेर में संरक्षित है। महात्मा गांधी से जुड़े कुछ प्रसंगों के अंश।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर से पहली मुलाक़ात शांति निकेतन में स्वालंबन प्रशिक्षण के दौरान 6 मार्च 1914 को की थी। 8 मार्च को गांधी अजमेर आए। यहां उन्होंने सार्वजनिक सभा में अंग्रेजी कानून का बहिष्कार करने का आव्हान किया। अंग्रेजो ने इसे राजद्रोह माना और 9 मार्च को उनके गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए। इस बीच बापू रेल मार्ग से अहमदाबाद के लिए रवाना हो गए। 10 मार्च को गिरफ्तार हुए और उनके खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया।

मात्र आठ दिन चली सुनवाई
महज आठ दिन चली सुनवाई के बाद अदालत ने उनको छः वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुना दी। इसके विरोध में 18 मार्च को राष्ट्र व्यापी बंद आयोजित कर काला दिवस मनाया गया। गांधी जी के समाचार पत्र हिन्दी नवजीवन की प्रति सुरक्षित रखने वाले अजमेर निवासी संग्रहकर्ता बीएल सामरा ने बताया कि यह जानकारी समाचार पत्र में प्रकाशित विवरण पर आधारित है।

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इतिहास के जानकारों की मानें तो वायसराय लॉर्ड रिंडिंग भारत में आने से पूर्व ब्रिटेन के न्याय मंत्री रह चुके थे। उन्हीं के कार्यकाल में सबसे अहम और चर्चित मुकदमा महात्मा गांधी से संबंधित रहा। जिसमें बापू को सजा सुनाई गई।

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अजमेर में बापू ने दिया था भाषण
अजमेर की सभा में 8 और 9 मार्च वर्ष 1921 में दिए गए अपने भाषण के अंश को अदालत में दुहरा कर उसकी पुष्टि की और अदालत में बिल्कुल भी विचलित नहीं हुए। उनके राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले को भी 6 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। सजा सुनकर गांधी ने कहा था , जज साहब ! आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आपने मुझे मेरे गुरु के समकक्ष खड़ा कर दिया। उस समय वहां उपस्थित पत्रकार नरहरि चिंतामणि देशमुख ने स्वयं रिकॉर्ड किया बाद में गांधीजी के अखबार में प्रकाशित हुआ। इसमें अंग्रेज न्यायधीश जस्टिस ब्रूमफील्ड ने अपना आसन ग्रहण करने से पूर्व गांधीजी को संबोधित करते हुए अपना सिर झुका कर कहा 'आई सैल्यूट मिस्टर गांधी यू हैव डन योर ड्यूटी टुवर्ड्स योर नेशन' "एंड नाउ आई एम गोइंग टू डू माय ड्यूटी टुवर्ड्स माय गवर्नमेंट" । इसके बाद उन्होंने गांधी जी को 6 वर्ष के कारावास की सजा सुना दी।