
पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क. अजमेर. जीवन की शुरुआत बहुत साधारण थी. . .। माता-पिता खर्चा नहीं वहन कर पाते थे. . मां जेब खर्च के लिए प्रतिमाह 50 रुपए देतीं थीं। उन्हीं को जोड़ कर 350 रुपए में पहली बार बॉक्सिंग ग्लव्ज खरीदे. . .। वहीं से बॉक्सिंग की शुरुआत की। ओलंपिक पदक विजेता व पदम विभूषण मेरीकॉम शनिवार को अजमेर में थीं। उन्होंने अपने संघर्षशील जीवन के साथ पारिवारिक पृष्ठभूमि, शुरुआती जीवन और करियर के प्रसंग पत्रिका से साझा किए। हालांकि हौसले, हिम्मत और जीवट का पर्याय बन चुकीं मजबूत मुक्केबाज मैरिकॉम इस बीच पनियल आंखों के साथ कई बार भावुक होने से स्वयं को नहीं रोक सकीं. .।
चुनौती कबूलीं, हिम्मत रखी
उन्होंने बताया महिला होने के नाते बॉक्सिंग के क्षेत्र में जाने की कड़ी चुनौती थी। बहुत से लोगों ने नकारात्मक बातें की। विवाह के बाद तो परिवार का दायित्व बढ़ने से चुनौतियां बढ़ीं। बच्चों की देखभाल, घर में खाना बनाना, साफ सफाई झाडू-पोंछा करने के साथ खेल का अभ्यास भी करना पड़ता था। हालांकि बचपन से जिद्दी थी. . सोच लिया उसे पाकर ही दम लेती. . .।
दृढ़ इच्छा शक्ति व मानसिक रूप से सशक्त होना जरूरी
उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में जाने की इच्छा शक्ति होना जरूरी है। इसके साथ मानसिक रूप से मजबूत होना पड़ेगा। इसमें शिक्षा और फिटनेस जुड़ जाए तो आप किसी भी लक्ष्य को हासिल कर सकते हो। उन्होंने कहा कि महिलाएं भी उनकी तरह सशक्त बनें।
अभिभावक करें प्रोत्साहित
मैरिकॉम ने कहा कि बच्चों को अभिभावक प्रोत्साहित करें। वह खेल में कैसे भी हों लेकिन उन्हें आगे बढने में सहयोग करें। खेल स्टेडियम व अन्य संसाधनों का तभी फायदा मिलेगा जब बच्चे इनका उपयोग कर खुद को पारंगत करेंगे। छोटे-छोटे मैदानों से निकल कर ही बच्चे बड़े दक हासिल करते हैं। उन्होंने कहा कि मेरे गांव में खेल मैदान व संसाधन नहीं होने के बावजूद मैंने हिम्मत नहीं हारी। इससे पूर्व उन्होंने स्टेज पर बच्चों के साथ बॉक्सिंग का डेमो दिया। इससे पूर्व वे यहां एक निजी स्कूल में स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स व इंडोर स्टेडियम का उद्घाटन करने पहुंची।
Published on:
26 Mar 2023 09:58 am
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