
fake promotion case
अजमेर
नगर निगम में पिछले महीने जमादार से सफाई निरीक्षक के पद पर हुई पदोन्नति में गड़बड़ी सामने आई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए महापौर ने सफाई निरीक्षक पद पर पदोन्नत किए गए लोगों के दस्तावेजों की जांच के आदेश दिए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार जमादार से सफाई निरीक्षक के पद पर कुछ जमादारों को पदोन्नति देते समय उनकी शैक्षणिक योग्यता पर ध्यान नहीं दिया गया।
जमादार सफाई निरीक्षक के पद पर पदोन्नत तो हो रहे हैं लेकिन उन्हें अवकाश की अर्जी भी लिखनी नहीं आती। इससे अन्दाजा लगाया जा सकता है कि उनकी कार्य क्षमता क्या होगी। शिकायत के अनुसार पदोन्नत जमादारों में से कुछ पूर्व में फर्जी मार्कशीट के दम पर जमादार बने हैं जिनके प्रकरण आज भी न्यायालय में विचाराधीन है। नौकरी पर रहते हुए सरकार एवं प्रशासन से भी धोखाधड़ी के आरोपित हैं।
एक जमादार जो अभी पदोन्नत हुआ वह स्वयं को प्रकरण से बरी बताता है। लेकिन जब दोषी जमादारों की लिस्ट में दो क्रमांक ऊपर एवं नीचे के दो क्रमांक दोषी हैं तो उसी लिस्ट में शामिल बीच के आरोपित बरी कैसे हो सकते हैं। गौरतलब है कि 23 मई 2018 को निगम ने डीपीसी के जरिए के जमादारों को सफाई निरीक्षक के पद पर पदोन्नति दी थी।
17 साल पहले दर्ज हुई थी एफआईआर
वर्ष 2001 में निगम ने कार्मिकों को पदोन्नति दी थी इनमें से 24 के 8वीं के दस्तावेज फर्जी पाए गए थे। इस मामले में एफआईआर दर्ज करवाते हुए निगम ने पदोन्नत किए गए कार्मिकों को रिवर्ट भी कर दिया था। मामले की जांच में सामने आया कि जिस स्कूल से 8 वीं कक्षा पास होना बताया गया है वह स्कूल ही अस्तित्व में नहीं है।
इनका कहना है
सफाई निरीक्षक के पद पर पदोन्नति को लेकर शिकायत मिली है। यह गंभीर मामला है। पदोन्नत किए गए कार्मिकों के दस्तावेजों की त्वरित जांच के निर्देश दिए गए हैं।
-धर्मेन्द्र गहलोत, महापौर अजमेर नगर निगम
Published on:
30 Jun 2018 10:11 am
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