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संगीत और साज ने दी सजायाफ्ता बंदियों के जीवन को नई दिशा

पहल : अजमेर सेंट्रल जेल में कैदियों ने बनाया अपना ब्रास बैण्ड, स्वतंत्रता दिवस समारोह में देंगे प्रस्तुति  

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अजमेर

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Manish Singh

Aug 11, 2022

संगीत और साज ने दी सजायाफ्ता बंदियों के जीवन को नई दिशा

संगीत और साज ने दी सजायाफ्ता बंदियों के जीवन को नई दिशा

मनीष कुमार सिंह

अजमेर. सेन्ट्रल जेल में हत्या, बलात्कार जैसे संगीन अपराध की सजा काट रहे ग्यारह बंदियों ने संगीत के सात सुरों में जीवन जीने का आधार ढूंढ लिया है। वे संगीत और ड्रम की थाप पर कदमों से कदम मिलाने के अभ्यास में जुटे हुए हैं। ताकि पुलिस लाइन मैदान में जिला स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में अपनी प्रस्तुति देकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर सकें। इन सजायाफ्ता बंदियों को प्रशिक्षित करने में न केवल सेन्ट्रल जेल के अधिकारी दिन-रात जुटे हैं बल्कि पुलिस व कई वरिष्ठ प्रशिक्षक उन्हें संगीत की सरगम के साथ कदम-ताल का अभ्यास करवा रहे हैं।

...बदल गया जीवन

पत्रिका से बातचीत में बंदियों ने बताया कि अब तक जेल की सलाखों के बीच जिन्दगी बिना लक्ष्य कट रही थी लेकिन संगीत से जुड़ने के बाद काफी बदलाव आया है। जेल में संगीत का अभ्यास और जेल के अन्दर व बाहर विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुतियों में मिले अवसर से उनके जीवन को नई दिशा मिल चुकी है।

बैण्ड में यह हैं शामिल

जेल ब्रास बैण्ड में ट्रम्पपेड के साथ मास्टर महेन्द्र जैन अभ्यास कर रहे हैं। वहीं चैनाराम(26), धन्नालाल(45), धर्मानाथ(48) ट्रामोन एवं राकेश गुर्जर(30), राकेश पंवार(37) ट्रम्पपेड पर राष्ट्र गीत के साथ देशभक्ति के तराने बजाएंगे। जबकि बेस ड्रम पर 36 वर्षीय भवानी, साइड ड्रम पर ग्रुप के वरिष्ठ साथी भगवान नाथ(47) लय और ताल का संगम करेंगे। बैण्ड में एम-फोन पर संदीप शर्मा(37), झांझ पर दशरथ(38) और घूघरा देवा रावल(50) साथ देंगे। जेल में ब्रास बैण्ड के अलावा नवीन म्यूजिकल आशाएं नाम से बंदियों की ऑर्केस्ट्रा पार्टी भी है जो आधुनिक वाद्ययंत्रों पर देशभक्ति व फिल्मी तराने बजाने में मास्टरी हासिल कर चुकी है।

मिली नई पहचान

जेल अधीक्षक सुमन मालीवाल के प्रयासों से अजमेर सेन्ट्रल जेल में ब्रास बैण्ड मूर्तरूप ले सका है। बंदियों के इस बैण्ड को नई पहचान मिली है। जेल निरीक्षण के दौरान जेल अधिकारियों के साथ न्यायिक अधिकारी भी ब्रास बैण्ड को सराह चुके हैं। बंंदियों के बैण्ड को तैयार करने में पुलिस बैण्ड के साथ प्रकाश, विजय, मोहम्मद जावेद, गजराज ने वाद्ययंत्रों का प्रशिक्षण दिया जबकि सेना से सेवानिवृत्त 90 वर्षीय सैन्य अधिकारी शमशुल हुसैन और उनके पुत्र महबूब हुसैन संगीत के साथ-साथ उनमें जोश भरने का काम कर रहे हैं।