
smita bellur
अजमेर.
आसोज की श्वेत चांदनी में सुरीले राग गूंज उठे। सर्वपंथ समभाव से जुड़े गीतों (songs) ने सुनने वालें के अंतर्मन को झंकृत कर दिया। सुरीले संगीत पर रागों के उतार-चढ़ाव सबको पसंद आया। मेयो कॉलेज के (mayo college) कांगड़ा एम्फीथियेटर में यह माहौल नजर आया।एस.एम. लोढा फाउन्डेशन के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में शास्त्रीय गायिका (classical singer) स्मिता बेलूर ने अपने हुनर का जादू बिखेरा।
महात्मा गांधी की 150 वीं जन्मशती पर सर्वपंथ समभाव (cummunal harmony) की झलक दिखी। स्मिता ने वैष्णव जनतो तैने कहिए...भजन सुनाकर राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि दी। कबीर (kabir) के दोहों की झलक चदरिया झीनी रे झीनी....गीत में नजर आई। सूफियाना (sifiyana) कलाम छाप तिलक सब..., मोरी लाज रखो हरि...सहित अन्य गीतों ने भारत की समृद्ध संस्कृति, सौहार्द और अनकेता में एकता का एहसास कराया।
इस दौरान सुदिति मेहता और संविद ने ध्रुपद (dhrupad) और ख्याल (khayal) की प्रस्तुति दी। महज दो-तीन महीने में ही शास्त्रीय संगीत सीखने वाले बाल कलाकारों (child artist) की प्रस्तुति सराहनीय रही।
इससे पहले एस.एम. लोढा फाउन्डेशन की निदेशक पुष्पा लोढा ने स्वागत किया। इस दौरान सुमतीमल लोढ़ा, नमृता चौकसी, प्रगति जैन, तृप्ति जैन, प्रेरणा सेठिया, स्मृति मेहता और अन्य मौजूद रहे।
गांधीजी ने जोड़ा सभी धर्मों को..
लोढा फाउंडेशन की स्मृति मेहता ने बताया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (mahatma gandhi) ने भारतीय संस्कृति और सभी धर्मों को बढ़ावा दिया। उनकी 150 वीं जन्मशती (150th centenary) को ध्यान में रखते हुए इस बार भक्ति संगीत कार्यक्रम रखा गया। भारतीय संगीत (indian music) में हृदय को तरंगित करने, संस्कृति, सभ्यता (culture) को बढ़ावा देने की क्षमता है। युवा पीढ़ी को इससे अपना चाहिए। मालूम हो कि गायिका बेलूर निर्गुण भक्ति, सूफी, हरिदास और अन्य पारंपरिक और आध्यात्मिक संगीत को बढ़ावा देने में जुटी हैं।
Published on:
06 Oct 2019 10:38 am
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