कॅरियर के अच्छे विकल्प, यूनिवर्सिटी में एनसीसी है ना रोवर रेंजर

raktim tiwari

Updated: 18 Oct 2019, 07:15:00 AM (IST)

Ajmer, Ajmer, Rajasthan, India

रक्तिम तिवारी/अजमेर. रक्षा सेवा में जाने के लिए एनसीसी (NCC)और रोवर-रेंजर (Rover and ranger) बेहतरीन विकल्प हैं। स्कूल-कॉलेज में हजारों विद्यार्थी इनसे जुड़े हैं, लेकिन महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (mdsu ajmer) को युवाओं की रत्तीभर परवाह नहीं है। यहां एनसीसी और रोवर-रेंजर संचालित नहीं है। कैंपस में अध्ययनरत विद्यार्थी कॅरियर के दो बेहतरीन विकल्पों से वंचित हैं।

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एनसीसी की महत्ता
जल, थल और वायु सेना में कॅरियर के लिए लिहाज से देश के विभिन्न स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में एनसीसी संचालित हैं। राजस्थान सहित अन्य प्रांतों में यह एनसीसी मुख्यालयों के (ncc directorate)अधीन संचालित हैं। अजमेर में भी 2 राज एनसीसी नेवल, आर्टी बेटरी और अन्य यूनिट संचालित हैं। विद्यार्थी एनसीसी में प्रवेश लेकर स्थानीय, राज्य और राष्ट्रीय स्तरीय शिविरों में जाते हैं। इसके आधार पर उन्हें रक्षा और अन्य सेवाओं की प्रवेश परीक्षा, दाखिलों में अतिरिक्त अंक मिलते हैं।

रोवर-रेंजर भी अहम
स्कूल स्तर पर स्काउट-गाइड, कब-बुलबुल की तरह कॉलेज और विश्वविद्यालयों के स्तर पर रोवर-रेंजर (rover and ranger) संचालित है। इसमें छात्रों को रोवर और छात्राओं को रेंजर कहा जाता है। इसका उद्धेश्य विद्यार्थियों में अनुशासन, सामाजिक सरोकार और साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। मदस विश्वविद्यालय के युवा 32 साल से रोवर-रेंजर सुविधा से महरूम हैं।

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एनसीसी की गतिविधियां
-फायदे-स्थानीय, राज्य, राष्ट्रीय स्तरीय शिविर, गणतंत्र दिवस शिविर
-कैडेट सीखते हैं नौकायन, ड्रिलिंग, राइफल शूटिंग, फायर फाइटिंग
-शहर, गांव और देश में स्वच्छता अभियान-विभिन्न परीक्षाओं में सी अन्य सर्टिफिकेट पर नौकरियों में फायदा
-एनडीए, सीडीएस परीक्षा में पास होने पर रक्षा सेवा में तरजीह

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रोवर-रेंजर गतिविधियां-फायदे
-रॉक क्लाम्बिंग, मंकी जम्पिंग और अन्य साहसिक खेलकूद
-राइफल शूटिंग, मैपिंग, घुड़सवारी, टायर हर्डल और अन्य प्रशिक्षण
-स्वच्छता, साक्षरता, वृद्धजन से मुलाकात और अन्य कार्यक्रम
-प्रशिक्षण और विभिन्न परीक्षाएं पास करने वाले श्रेष्ठतम रोवर-रेंजर को राष्ट्रपति पुरस्कार
-रक्षा, सरकारी-निजी नौकरियों में सर्टिफिकेट के आधार पर तरजीह

13 साल पहले बना था एनसीसी प्रस्ताव
तत्कालीन कुलपति प्रो. एम. एल. छीपा के कार्यकाल में विश्वविद्यालय में एनसीसी शुरू करने का प्रस्ताव बना था। उदयपुर स्थित एनसीसी राजस्थान निदेशालय के अधिकारियों ने विश्वविद्यालय का दौरा भी किया था। लेकिन यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। मालूम हो कि विश्वविद्यालयों में एनीसीसी संचालन पर कुलपति को सेना द्वारा ‘कर्नल’ की मानद रैंकिंग दी जाती है।


स्कूल में कब-बुलबुल, स्काउट-गाइड की तरह कॉलेज-यूनिवर्सिटी में रोवर-रेंजर होते हैं। युवाओं के लिए यह बहुत खास है। वे अनुशासन और साहसिक गतिविधियां सीखते हैं। सामाजिक सरोकार में भागीदार बढ़ती है। देश के विभिन्न कॉलेज और यूनिवर्सिटी में रोवर-रेंजर संचालित है। एमडीएस यूनिवर्सिटी से कोई प्रपोजल मिला तो हम निश्चित तौर पर शुरुआत करेंगे।

महेंद्र विक्रम सिंह, डिवीजनल कमिश्नर स्काउट-गाइड
युवाओं के लिए एनसीसी-रोवर रेंजर होने आवश्यक हैं। स्नातक स्तरीय कोर्स के साथ रोवर-रेंजर चल सकती है। अगले सत्र से कैंपस कॉलेज में स्नातक स्तरीय कोर्स के साथ इसे शुरू करने का प्रस्ताव बनाएंगे। एनसीसी के लिए राजस्थान निदेशालय और रक्षा विभाग में बातचीत कर औपचारिकता पूरी करेंगे।
प्रो. आर. पी. सिंह, कुलपति मदस विश्वविद्यालय

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