1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पहले जिसने गिनाई थी खामियां, अब उस पर कानूनी ‘शिकंजा’

मुकदमा नं. 183: नशीली दवा तस्करी प्रकरण  

2 min read
Google source verification

अजमेर

image

Manish Singh

Apr 04, 2023

पहले जिसने गिनाई थी खामियां, अब उस पर कानूनी ‘शिकंजा’

पहले जिसने गिनाई थी खामियां, अब उस पर कानूनी ‘शिकंजा’

अजमेर. करोड़ाें की नशीली दवाओं की तस्करी से जुड़े रामगंज थाने में दर्ज मुकदमा संख्या 183 की जांच शुरू से ही लचीली रहने के कारण सवालों के घेरे में रही। इस मामले में जहां पहले तीन जांच अधिकारी हाइकोर्ट की नाराजगी के बाद बदले जा चुके हैं वहीं चौथी जांच अधिकारी दिव्या मित्तल की गिरफ्तारी की नौबत आ गई। पूछताछ के लिए दिव्या को जयपुर ले जाया गया है।

स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप(एसओजी) की निलम्बित एएसपी दिव्या मित्तल की दुबारा गिरफ्तारी इसी मुकदमे की तफ्तीश में लापरवाही बरतने के आरोप में की गई है। इससे पूर्व जिन तीन अधिकारियों को बदला गया, उनके खिलाफ कार्रवाई दिव्या की जांच रिपोर्ट पर ही की गई थी। बतौर एएसपी दिव्या ने तीनों के अनुसंधान में खामियां निकालने के बाद हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश की थी।

...मैं ही क्यों?

सूत्रों के मुताबिक अब तक की पूछताछ में निलंबित एएसपी दिव्या ने जांच में रही खामी को लेकर अनुसंधान अधिकारी एएसपी कमलसिंह तंवर से अपनी गिरफ्तारी पर सवाल किए हैं। उसका तर्क था कि उससे पूर्व प्रकरण में तीन आईओ बदले? उन्होंने भी खामी छोड़ी, फिर सीधे उसको क्यों गिरफ्तार किया।

अब दिव्या इसलिए गिरफ्तार : जांच एजेन्सी का मानना है कि दिव्या अनुसंधान हाथ में लेने के साथ ही भांप चुकी थी कि मामला कितना वजनदार है। यही कारण रहा कि फार्मा कम्पनी के संचालक सुनील नन्दवानी और विकास अग्रवाल से मोलभाव करने वह देहरादून पहुंच गई। इसके बाद नन्दवानी को अलवर गेट थाने में दर्ज एफआइआर 195/2021 में गिरफ्तार कर लिया। माना जाता है कि यह प्रकरण रामगंज थाने में दर्ज प्रकरण से हल्का था। नन्दवानी के खिलाफ पूरे तथ्य भी पेश नहीं किए। जो उसकी आसान रिहाई का कारण बने। वहीं मुकदमा मुकदमा संख्या 183 में सुनील नन्दवानी को गिरफ्तार ना कर उसको राहत दे दी।

इनकी यह रही थी खामियां

निलम्बित एएसपी दिव्या मित्तल ने पूर्व में तीन अनुसंधान अधिकारी के खिलाफ कोर्ट में जो रिपोर्ट पेश की थी, उसमें यह खामियां गिनाई थीं-

सीआई दिनेश कुमावत : प्रकरण में 24 मई से 29 मई 2021 तक अनुसंधान किया। घटनास्थल में प्रयुक्त परिसर के स्वामित्व संबंधित दस्तावेज नहीं लिए ना इस संबंध में अनुसंधान किया।

सीओ मुकेश सोनी : 29 मई से 3 जुलाई 2021 तक अनुसंधान किया। बिना केस डायरी अवलोकन व अनुसंधान मुख्य आरोपी श्याम सुन्दर मूंदड़ा के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/22 को हटाकर 8/29 लगा दी जबकि सहआरोपियों के खिलाफ यथावत रखी। हालांकि बाद में पुलिस मुख्यालय ने अदालत में अनुसंधान का पक्ष स्पष्ट कर दिया था।

एसओजी निरीक्षक भूराराम खिलेरी : 30 जुलाई 2021 से प्रकरण का अनुसंधान किया। खिलेरी ने गोदाम के मालिक के बयान लेखबद्ध करने के अलावा उससे अन्य कोई अनुसंधान नहीं किया।

अब तक छह की गिरफ्तारी

प्रकरण संख्या 183 में अब तक नशीली दवा तस्करी के मास्टर माइंड समेत 6 गिरफ्तार हो चुके हैं। इसमें ट्रांसपोर्ट कम्पनी के गोदाम केयर टेकर मोमिन शाह, कालूराम जाट, ई-रिक्शा संचालक शेख साजिद, मेडिकल स्टोर व होलसेल व्यापारी श्याम सुन्दर मूंदड़ा, जयपुर का डिस्ट्रीब्यूटर शशि भारती और मास्टर माइंड कमलजीत मौर्य हैं। मौर्य की गिरफ्तारी के बाद दिव्या और फरार कांस्टेबल सुमित ने फार्मा कम्पनी संचालकों को जांच के दायरे में लेकर करोड़ों की वसूली का खेल रचा।

इनका कहना है...

एनडीपीएस एक्ट में दर्ज प्रकरण 183/21 में सुनील नन्दवानी की गिरफ्तारी नहीं करने को गम्भीर मानते हुए गिरफ्तार किया गया है। जबकि अलवर गेट थाने में दर्ज प्रकरण 195/21 में नन्दवानी को गिरफ्तार किया जा चुका है। अनुसंधान के तथ्यों पर पड़ताल की जा रही है। उनको कोर्ट के समक्ष रखा जाएगा।

कमल सिंह तंवर, एएसपी व अनुसंधान अधिकारी एसओजी