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वो बिना हिला-डुले तलाशते रहे पैंथर को, परछाई भी नहीं दिखी जनाब की

कल्याणीपुरा क्षेत्र में भी ग्रामीणों ने पिछले साल पैंथर देखने का दावा किया था।

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forest dept annual census

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वन विभाग ने वन्य जीवों की सालाना गणना पूरी करा ली। वनकर्मियों को विभिन्न जलाशयों और चिन्हित स्थानों के निकट और पहाड़ी इलाकों में पैंथर नजर नहीं आया। अलबत्ता कई साल बाद तारागढ़ इलाके में दो गिद्ध जरूर दिखे। कर्मचारियों की टीमों के वापस लौटने के बाद विभाग रिपोर्ट तैयार करेगा।

अजमेर वन मंडल के किशनगढ़ में गूंदोलाव झील, ब्यावर में सेलीबेरी, माना घाटी, पुष्कर में गौमुख पहाड़, बैजनाथ मंदिर , नसीराबाद में सिंगावल माताजी का स्थान, सरवाड़ में अरवड़, अरनिया-जालिया के बीच, नारायणसिंह का कुआं, सावर-कोटा मार्ग और अन्य वाटर हॉल पर वन्य जीवों की गणना हुई। कार्मिकों को खरगोश, नेवले, मोर, अजगर, जलमुर्गी, बिज्जू और अन्य जीव ही नजर आए। अजमेर में जयपाल बाबा मंदिर, गौरी कुंड, चौरसियावास तालाब, आनासागर, फायसागर, चश्मा ए नूर, नरवर और अन्य स्थानों पर पैंथर दिखाई नहीं दिया।

तारागढ़ क्षेत्र में दिखे गिद्ध
तारागढ़ क्षेत्र में गणना के दौरान दो गिद्ध दिखाई दिए। विभाग की मानें तो गणना में कई साल बाद गिद्ध दिखे हैं। इसको लेकर विभाग में काफी उत्साह दिखा। फिलहाल मंडल के सभी क्षेत्रों से पूरी रिपोर्ट नहीं है। अधिकारियों का मानना है, कुछ अन्य इलाकों में भी गिद्ध हो सकते हैं।

पुष्कर-ब्यावर क्षेत्र पर नजर

अजमेर मंडल के पुष्कर, ब्यावर और जवाजा क्षेत्र पर विभाग की विशेष नजरें हैं। पहाड़ी इलाका और पेड़-पौधों के कारण इन इलाकों में अक्सर पैंथर, सियार, लोमड़ी, अजगर और अन्य वन्य जीव दिखाई देते रहे हैं। इन इलाकों में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में पैंथर कई बार दिख चुका है। फिर भी सालाना गणना में भी पैंथर नहीं दिखा। जबकि ग्रामीण कई बार पैंथर दिखने का दावा कर चुके हैं। अजमेर से सटे कल्याणीपुरा क्षेत्र में भी ग्रामीणों ने पिछले साल पैंथर देखने का दावा किया था। लेकिन विभाग को यहां से खाली हाथ लौटना पड़ा था।

कर्मचारी जुटे रिपोर्ट बनाने में

मंगलवार सुबह तक वन्य जीवों की गणना का काम चला। विभिन्न इलाकों में गए कर्मचारियों का लौटना शुरू हो गया है। कर्मचारी रिपोर्ट बनाने में जुटे गए हैं। वन्य जीवों की सूचनाओं का संकलन कर रिपोर्ट तैयार होगी। बाद में इसे वन मुख्यालय जयपुर भेजा जाएगा।