
पुष्कर . नए रंगजी मंदिर में चल रहे ब्रह्मोत्सव के तहत भगवान वैकुंठनाथ की बसंत रूप में शृंगारित सवारी निकाली गई। हाथ में पिचकारी लिए पीतवस्त्र धारण किए भगवान वैकुंठनाथ के दर्शन करने को सैलाब उमड़ पड़ा। भजनों की प्रस्तुतियों के बीच बैंड की धुनों पर मनोहारी झांकियों के साथ भगवान की अगवानी करके रंगोलियां सजाई गई। पुजारियों ने भक्तों पर अबीर-केसर छिडक़ कर भगवान वैकुंठनाथ की भक्तों के संग होली खेलने की धार्मिक परम्परा का निर्वहन किया।
इससे पहले शाम पांच बजे भगवान वैकुंठनाथ की अष्टधातुयी प्रतिमा को मंत्रों से अभिमंत्रित करके पुष्पमालाओं, रत्नजडि़त हारों से शृंगारित कर स्वर्ण से बने मंगलगिरी पर विराजमान कराया गया। झांकियों व भजनों के बीच बंसती रूप में सजे भगवान के दर्शन करने के लिए पूरा कस्बा कतारबंद खड़ा नजर आया। सूर्यधर्मशाला से वराह घाट चौक, गऊ घाट, हलवाई गली से होली का चौक पुराना रंगनाथ मंदिर मार्ग से होती हुई बसंत की सवारी का पुन: मंदिर में प्रवेश हुआ तथा प्रसाद वितरण किया गया।
महाशक्तियो का मिलन
आयोजन में उस समय बड़ा ही अद्भुत नजारा देखने को मिला जब त्रैलोक अधिष्ठाता भगवान रंगनाथ मंदिर के सामने से वैकुंठनाथ की सवारी निकली। वैकुंठ के अधिष्ठाता माने जाने वाले भगवान रंगनाथ व भगवान वैकुंठनाथ का वर्ष में एक बार का यह मिलन देखते ही बना। पुराने रंगनाथ मंदिर के पुजारियों ने बसंती ररूपी वैकुंठनाथ का अभिनन्दन किया।