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हवा के झोंको ने हिलाया टाटा के तंत्र को, एक झटके में निकल गई टाटा पावर के दावों की हवा

बड़े-बड़ दावों के साथ शहर की बिजली व्यवस्था संभाल रहे टाटा पावर का विद्युत तंत्र को हवा के तेज झोंकों से ही हिल गया।

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people face electricity problem because of tata power

अजमेर . बड़े-बड़ दावों के साथ शहर की बिजली व्यवस्था संभाल रहे टाटा पावर का विद्युत तंत्र को हवा के तेज झोंकों से ही हिल गया। इसके चलते शहर की कई कॉलोनियों में लोगों को कई घंटों तक अघोषित कटौती की मार झेलनी पड़ी।


टाटा पावर के कॉल सेंटर व टाटा पावर के अधिकारी उपभोक्ताओं को संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। अधिकारी तो खुद बिजली गुल होने के मामलों में अंजान बने रहे।

रीजनल कॉलेज फीडर से जुड़े वैशाली नगर के कुछ क्षेत्र, चाणक्यपुरी, एमपीएस स्कूल के पीछे, अलखनन्दा कॉलोनी में सुबह 11 बजे गुल हुई बिजली दोपहर करीब 2 बजे वापस लौटी। टाटा पावर के कॉर्पोरेट हैड आलोक श्रीवास्तव के अनुसार गिलहरी के कारण फाल्ट आया था। लोहागल क्षेत्र में भी एक घंटे तक बिजली गुल रही।


चंदवरदायी फीडर से जुड़े रामगंज, गोविंद नगर की बिजली कई घंटे तक बंद रही। टाटा पावर के अधिकारियों का कहना रहा कि हवा के चलते तार आपस में टकरा रहे थे। इससे बिजली बंद हो गई।

गुरुवार शाम को भी हाथीभाटा क्षेत्र की बिजली करीब तीन घंटे तक बंद रही। इसके लिए केबल में फाल्ट को कारण बताया गया।


फिर किस बात का मेंटीनेंस

टाटा पावर की ओर से उपभोक्ताओं को त्वरित सेवा व गुणवत्ता पूर्ण बिजली दिए जाने के दावे किए जा रहे हैं, जबकि हकीकत इसके उलट है। टाटा पावर की ओर से विद्युत सुधार के नाम पर शहर की बिजली कई घंटों तक काटी जा रही है, लेकिन सुधार नजर नहीं आ रहा। सुधार के नाम पर सिर्फ ट्रांसफार्मर पर नीला पेंट कर अपना कब्जा जताया जा रहा है।


अभी से यह हाल, चरमराई व्यवस्था

टाटा पावर ने जुलाई में शहर की कमान संभाली थी। अगस्त में टाटा पावर ने पूरी तरह से सिस्टम को टेकओवर कर लिया। उसे गर्मी व बरसात का सामना नहीं करना पड़ा। गर्मी का ख्वाजा साहब का उर्स भी गुजर चुका था। अब टाटा पावर को असली चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इसमें टाटा पावर की व्यवस्था चरमराती नजर आ रही है। टाटा पावर के अभियंता व अप्रशिक्षित कर्मचारी लापरवाही बरत रहे हैं। अजमेर डिस्कॉम प्रबंधन का भी इन पर कोई नियंत्रण नजर नहीं आ रहा है।