
panther in village
श्रीनगर से अजमेर घाटी में मंगलवार को रात्रि दस बजे बाद घाटी में बाघ होने की सूचना होने पर ग्रामीणों में भयंकर दशहत व्याप्त है। जानकारी के अनुसार श्रीनगर से अजमेर घाटी के जंगलों में बाघ देखने की सूचना बड़ल्या के उदयसिंह रावत ने श्रीनगर सरपंच प्रतिनिधी व वार्डपंच दिलीप राठी को दी।
इस पर राठी ने श्रीनगर थानाप्रभारी को श्रीनगर से अजमेर घाटी में बाघ होने की सूचना दी इस पर श्रीनगर थानाप्रभारी हरीश चौधरी मंगलवार रात्रि में ही मय पुलिस जाप्ते के श्रीनगर से अजमेर घाटी पर पहुंचें। थानाप्रभारी चौधरी ने पुलिस जवानों के साथ देखा तो उन्हे कई जगहों पर बाघ के पदचिन्ह दिखाई दिये।
बुधवार को प्रातकाल बाद कस्बें के कई ग्रामीणों में घाटी के पास बाघ आने की सूचना आग की तरह फैल गई। श्रीनगर से अजमेर काम करने जाने वाले दिहाड़ी मजदूर अपने दुपहिया वाहन से रोज देर रात्रि में घर लौटते हैं ऐसे में घाटी में बाघ आने की सूचना पर ग्रामीण काफी भयभीत दिखाई दिये।
श्रीनगर निवासी रघुनंदन पारीक ने बताया कि वह मंगलवार रात्रि में अजमेर से श्रीनगर बाईक पर आ रहा था इसी दौरान श्रीनगर से अजमेर घाटी के पास सड़क के दूसरे किनारे तीन जंगली जानवर सोते हुए दिखाई दिये इस पर पारीक का मानना हैं कि संभवतया वह बाघ ही थे।
बुधवार को सूचना पर वन विभाग से वनपाल मुकेश मिश्रा, वन कर्मचारी मोहनसिंह रावत, सीताराम व लल्लूराम कहार जंगलों में जाकर बाघ की तलाश की लेकिन उन्हे किसी प्रकार से बघेरा के कोई पदचिन्ह नजर नहीं आये। वनकर्मी मोहनसिंह रावत का कहना था कि जंगलों में जो पदचिन्ह देखे गये वह किसी प्रकार से कोई बाघ या लकड्बघे के भी नहीं है। रावत का मानना था कि उक्त चिन्ह तो कुत्ते के है।
बाघ के पदचिन्ह का फोटो हुआ वायरल
श्रीनगर। श्रीनगर से अजमेर घाटी के जंगलो में बाघ की सूचना पर बाघ के पदचिन्ह का फोटो वाट्सअप पर वायरल होने से कस्बें मे काफी चर्चा का विषय बना रहा । श्रीनगर में हर जगह बाघ की चर्चा ही चल रही थी।
10 वर्षो पूर्व भी देखा गया था बाघ
श्रीनगर। श्रीनगर से अजमेर घाटी पर जंगलों में करीब 10 वर्ष पूर्व भी एक बाघ दिखाई दिया था। श्रीनगर से अजमेर रोड़ पर दर्रा वाली बेरी के पास करीब 10 वर्ष पूर्व एक बाघ ग्रामीणों को दिखाई दिया था उस दौरान भी वन विभाग के कर्मचारियों ने हल्के में लेते हुए उसे बाघ नहीं माना फिर उसी दौरान एक कोख मे उक्त बाघ को ग्रामीणों ने छिपा देखा लेकिन वन विभाग उक्त बाघ को पकडऩे में सफल नहीं हुये ओर बघेरा एक बड़ी दहाड के साथ बाहर निकलकर जंगलों की ओर भाग गया उसी बघेरा ने अगले दिन नौलखा के पास बकरियों को अपना शिकर बनाया था ।
Published on:
19 Apr 2017 07:41 pm
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