
शिवालयों में पूजन और सहस्रधारा, कावडिय़ों का कुछ यूं उमड़ा जनसैलाब
अजमेर. शिवालयों में भगवान शंकर की पूजा-अर्चना जारी है। रविवार को भी मंदिरों में मंत्रोच्चार से रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, पूजन का दौर चला। कावडिय़ों ने पुष्कर से जल लाकर मंदिरों में अभिषेक किया।
केसरगंज, बिहारी गंज, नया बाजार, आंतेड़, आगरा गेट, वैशाली नगर, कोटड़ा, आदर्श नगर, कोटेश्वर महादेव मंदिर, मदार गेट, रामगंज और अन्य शिवालयों में लोगों ने बिल्व पत्र, पुष्प, हल्दी-चंदन, दूब, दूध और अन्य सामग्री से भगवान शिव, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और नंदी की पूजा-अर्चना की। कई जगह मंत्रोच्चार और रुद्रिपाठ के साथ जलाभिषेक, रुद्राभिषेक हुआ। कावडि़ए नाचते-गाते पुष्कर से जल लेकर पहुंचे।
परम्परानुसार सावन का दूसरा वन सोमवार 6 अगस्त को होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत रखने वाली महिलाएं-बालिकाएं सुभाष उद्यान अथवा अन्य स्थानों पर जाकर भोजन करेंगी। सावन माह में अब 13 और 20 अगस्त को वन सोमवार आएंगे। कावडिय़ों का उमडऩे लगा सैलाब
अजमेर. श्रावण (सावन) मास में भोलेनाथ का रुद्राभिषेक करने के लिए भी जिलेभर से श्रद्धालु कावडि़ए तीर्थनगरी पुष्कर स्थित सरोवर से पैदल ही कावड़ लेकर पहुंच रहे हैं। अजमेर से पुष्कर के मध्य कावडिय़ों की ओर से बोल बम-बोल बम, बोले के भाई बमबोले, भोले भंडारी के जयकारों की गूंज से माहौल भक्तिमय बना हुआ है।
केसरिया वेश एवं भगवान भोले के चित्र से बने वस्त्रों को धारण कर कंधों पर कावड़ लेकर आने वाले कावडिय़ों का जगह-जगह स्वागत किया जा रहा है। अजमेर सहित नागौर जिलों के कई गांवों से प्रतिदिन कावडिय़ों का रैला शुरू होता है तो रात्रि में भी जारी रहता है। इन कावडिय़ों के साथ ट्रेक्टर सहित अन्य डीजे आदि का गाडिय़ां भी चल रही हैं। जिसमें अल्पाहार आदि की व्यवस्था रहती है। पुष्कर सरोवर की पूजा अर्चना के साथ कावड़ में जल भरकर श्रद्धालु जोश के साथ पैदल एवं नंगे पांव ही आगे बढ़ते जाते हैं। कावड़ यात्रा में शामिल पिलोदा (भिनाय) निवासी शिवराज के अनुसार वे लगातार दो दिन पैदल चल कर सोमवार को सुबह पिलोदा पहुंचेंगे और सोमवार को शिवमंदिर में सहस्त्रधारा, जलाभिषेक करेंगे।
रात्रि में नहीं सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था
कावडिय़ों की सुरक्षा के मद्देनजर पुष्कर एवं अजमेर के मध्य पुख्ता व्यवस्था नहीं है। वाहनों की आवाजाही एवं ओवरटेक करने वाले वाहनों के चालकों को भी कावड़ यात्रा के समय सुरक्षा का ध्यान रखने की आवश्यकता है। यही नहीं कावड़ यात्रा के आयोजकों को भी कावडिय़ों के वाहनों के आने पर सड़क से नीचे उतरने की हिदायत देनी चाहिए, खासकर पीछे से आने वाले वाहनों से बचने के लिए पगडंडी मार्ग से ही आगे बढऩा चाहिए।
Published on:
06 Aug 2018 09:30 am
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