
अजमेर . हिस्ट्रीशीटर व पुलिस के बर्खास्त सिपाही धर्मेन्द्र चौधरी की हत्या के मास्टर माइंड प्रॉपर्टी डीलर विक्रम शर्मा व उसके एक साथी जिला पुलिस ने गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। दोनों डेढ़ साल पहले वारदात के बाद से फरार थे। प्रारंभिक पड़ताल में आरोपितों ने प. बंगाल, मध्यप्रदेश और दिल्ली समेत कई राज्यों में फरारी काटी। शुक्रवार को सदर कोतवाली थानाप्रभारी व स्पेशल टीम ने आरोपितों को दिल्ली से गिरफ्तार कर अजमेर ले आई। पुलिस उनसे पूछताछ में जुटी है।
पुलिस उप अधीक्षक(उत्तर) डॉ. दुर्गसिंह राजपुरोहित ने बताया कि हिस्ट्रीशीटर धर्मेन्द्र चौधरी हत्याकांड के पांच-पांच हजार रुपए के इनामी अपराधी प्रॉपर्टी व्यवसायी बी.के.कौल नगर निवासी विक्रम शर्मा और उसके साथी घूघरा संस्कृति स्कूल के सामने जय हनुमान कॉलोनी निवासी संजय सिंह को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। आरोपित की डेढ़ साल पहले 10 नवम्बर 2016 को इंडौर स्टेडियम के सामने हिस्ट्रीशीटर व बर्खास्त सिपाही धर्मेन्द्र चौधरी की गोली मारकर हत्या के बाद से फरार है। धर्मेन्द्र चौधरी की पत्नी की ओर से दी गई शिकायत में प्रॉपर्टी व्यवसायी विक्रम शर्मा समेत सात लोग नामजद है। आरोपित ने डेढ़ साल की फरारी में पश्चिम बंगाल में कोलकाता, दिल्ली, मध्यप्रदेश उज्जैन में फरारी काटी। पुलिस आरोपितों से गहनता से पड़ताल में जुटी है।
यूपी-एमपी में दी दबिश
एसपी राजेन्द्रसिंह के आदेश पर पुलिस की तीन टीम ने मध्यप्रदेश व उत्तर प्रदेश में दबिश दी। मध्यप्रदेश और यूपी से मिली सूचना पर पुलिस ने दिल्ली में दबिश दी। जहां हत्याकांड का मास्टर माइंड प्रॉपर्टी व्यवसायी विक्रम शर्मा साथी संजय सिंह के साथ पकड़ा गया। दोनों लम्बे समय से दिल्ली में फरारी काट रहे थे।
अब तक छह हुए गिरफ्तार
धर्मेन्द्र चौधरी हत्याकांड में विक्रम शर्मा समेत अब तक छह जने गिरफ्तार हो चुके हैं। वारदात के बाद मुख्य आरोपित हिस्ट्रीशीटर संजय मीणा ने साथी शेरसिंह के साथ सम्र्पण किया था। सिविल लाइंस थानाप्रभारी करणसिंह खंगारोत ने पप्पूराम उर्फ झंडे मीणा और कृष्ण कुमार उर्फ रिंकू मीणा को गिरफ्तार किया। विक्रम शर्मा व संजय राठौड़ प्रतिद्वंद्वी गिरोह के मास्टर माइंड व रामकेश हत्याकांड के मुख्य आरोपित वरुण चौधरी के निशाने पर है। अलवर गेट थाना पुलिस ने पिछले दिनों चौधरी गैंग के पांच गुर्गों को हथियार के साथ गिरफ्तार किया। आरोपितों ने विक्रम शर्मा, संजय राठौड़ व वकील सुरेन्द्र सिंह चौधरी की हत्या की साजिश रची थी।
टीम में यह थे शामिल
राजपुरोहित ने बताया कि ईनामी आरोपितों की गिरफ्तारी में कोतवाली थानाप्रभारी धर्मवीर सिंह, जिला पुलिस की स्पेशल टीम प्रभारी मनोज कुमार, एएसआई रामनारायण चौधरी, हैडकांस्टेबल मनोहरसिंह, सिपाही जोगेन्द्र सिंह, महिपाल सिंह, रतनसिंह, शंकरलाल, जितेन्द्रसिंह शामिल
अजमेर. डेढ़ साल की फरारी में प्रॉपर्टी व्यवसायी अजमेर आया लेकिन पुलिस को भनक तक नहीं लगी। पुलिस उसको प्रदेश के बाहर टटोलती रही। उसने फरारी के दौरान अजमेर और जयपुर में भी दिन गुजारे। पुलिस की प्रारंभिक पड़ताल में यह खुलासा हुआ है।
हिस्ट्रीशीटर व पुलिस के बर्खास्त सिपाही धर्मेन्द्र चौधरी की गोली मारकर हत्या के बाद प्रतिद्वंद्वी गिरोह के मास्टर माइंड विक्रम शर्मा वारदात के बाद वैशालीनगर स्थित होटल के पास संजय सिंह से मिले। दोनों पहले पुष्कर और फिर अजमेर से गुडग़ांव चले गए। कुछ दिन गुडग़ांव में रहने के बाद कोलकाता चले गए। चार माह कोलकाता में गुजारने के बाद दोनों वापस गुडग़ांव आ गए। यहां दोनों अलग हो गए। संजय सिंह ने नोयडा चला गया जबकि प्रॉपर्टी व्यवसायी विक्रम शर्मा का अजमेर आना-जाना शुरू हो गया। वह रात के अंधेरे में घर भी आया। पुलिस की प्रारंभिक पड़ताल में सामने आया कि डेढ़ साल की फरारी में चार मर्तबा अजमेर आया। वह जब भी अजमेर आता तो 2 से दस दिन तक ठहरता। इसके अलावा वह अजमेर के आसपास परिवार से मिलकर लौट जाता था।
बिगाडऩे लगा था सौदे
पुलिस पड़ताल में विक्रम शर्मा ने कबूला कि धर्मेन्द्र चौधरी ने कुछ साल पहले तक उसके साथ काम किया। अधिकांश जमीनी सौदे धर्मेन्द्र चौधरी ने अपने नाम कर उसकी जमीनें हड़प ली। उस पर जानलेवा हमला कर जान से मारने का प्रयास किया लेकिन धंधे अलग होने के बाद भी धर्मेन्द्र चौधरी उसके सौदे बिगाडऩे लगा था जिससे उसको नुकसान उठाना पड़ रहा था।
सीआईडी सीबी के पास है जांच
हालांकि धर्मेन्द्र चौधरी हत्याकांड की जांच फिलहाल सीआईडी सीबी के पास है। विक्रम व संजयसिंह के परिजन ने अदालत में याचिका लगाई कि उन्हें धर्मेन्द्र चौधरी हत्या की वारदात में झूठा फंसाया जा रहा है। परिजन ने मामले में फरार विक्रम शर्मा की ओर से पुलिस महानिदेशक के समक्ष भी अपनी बात रखी थी। इसके बाद प्रकरण को सीआईडी सीबी को दे दिया गया।
अभी दो है बाकी
धर्मेन्द्र हत्याकांड में पुलिस को अभी संजय मीणा के दो साथी की तलाश है। पुलिस की गिरफ्त से दूर संतोष मीणा और राजेश नामक युवक संजय मीणा के गुर्गे है। इधर रामकेश मीणा हत्याकांड में धर्मेन्द्र चौधरी के भतीजा और गिरोह का मास्टर माइंड वरुण चौधरी व उसका साथी जगत की पुलिस को तलाश है। वरुण चौधरी भी रामकेश की हत्या के बाद से फरार है। हालांकि वरुण के करीब डेढ़ दर्जन गुर्गे पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं।
Published on:
15 Jan 2018 09:45 am
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