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Jagan Gurjar Murder Case: पुलिस ने जेल में करवाया सीन रिक्रिएशन, विष्णु ने बताया- कैसे की जगन गुर्जर की हत्या?

Dacoit Jagan Gurjar Murder Case: घूघरा हाई सिक्योरिटी जेल में दस्यु जगन गुर्जर की हत्या के मामले में सिविल लाइंस थाना पुलिस की पूछताछ में आरोपी विष्णु सिंह जाट ने कई अहम खुलासे किए। उसने वारदात को अकेले अंजाम देना स्वीकार किया है।
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Jagan Gurjar Murder Case

पुलिस की गिरफ्त में जगन गुर्जर की हत्या का आरोपी विष्णु सिंह जाट। फोटो: पत्रिका

अजमेर। घूघरा हाई सिक्योरिटी जेल में दस्यु जगन गुर्जर की हत्या के मामले में सिविल लाइंस थाना पुलिस की पूछताछ में आरोपी विष्णु सिंह जाट ने कई अहम खुलासे किए। उसने वारदात को अकेले अंजाम देना स्वीकार किया है। उसने बताया कि चोरी के मामलों को लेकर लगातार होने वाली छींटाकशी से वह आहत था और कई दिनों से जगन की हत्या का मन बना चुका था। पूछताछ के दौरान विष्णु से जेल की सेल में हत्या की वारदात का सीन रीक्रिएशन कराया गया, जिसमें गमछे से फंदा कसने और सीसीटीवी कैमरे के लेंस पर टूथपेस्ट लगाने की पूरी प्रक्रिया का परीक्षण किया गया।

पुलिस के अनुसार प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार विष्णु सिंह जाट ने पूछताछ में जगन की हत्या की पूरी जिम्मेदारी स्वयं ली है। पुलिस के अनुसार घटना में किसी अन्य बंदी की भूमिका अब तक सामने नहीं आई है, हालांकि वार्ड-2 के ब्लॉक नंबर-4 में बंद अन्य कैदियों से भी न्यायालय की अनुमति मिलने के बाद पूछताछ की जाएगी। पुलिस ने बताया कि 3 जुलाई को प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार विष्णु ने पूछताछ में स्वीकार किया कि हत्या में इस्तेमाल गमछा उसका ही था, जिसको पुलिस ने जब्त कर लिया। उसका कहना है कि उसने अकेले ही गमछे से फंदा कसकर जगन गुर्जर की हत्या की।

जगन की छींटाकशी से बनाया हत्या का मन

पूछताछ में यह भी सामने आया कि हत्या का कारण किसी गैंगवार या साजिश से ज्यादा व्यक्तिगत कुंठा थी। विष्णु ने पुलिस को बताया कि उसके खिलाफ अधिकांश मामले चोरी के हैं। इससे जेल में जगन समेत उसके ब्लॉक के बंदी उसे बार-बार ‘चोर’ छोटा अपराधी कहकर ताने मारते थे। सबसे ज्यादा छींटाकशी जगन करता था, जिससे उसके मन में लगातार अपमान और आक्रोश बढ़ता गया। उसने कई दिन पहले ही हत्या का मन बना लिया था और 29 जून को मौका मिलते ही षड़यंत्र को अंजाम दे दिया।

जगन को नहीं मिला बचने का मौका

पुलिस जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि हत्या के समय जगन को बचाव या संघर्ष का मौका ही नहीं मिला। जांच के अनुसार घटना से पहले दोनों बंदी एक सेल में बैठकर लूडो खेल रहे थे। विष्णु ने दवा लेने के बहाना बनाकर उठने के बाद अचानक पीछे से अपने सिर पर बंधा गमछा खोलकर जगन के गले पर कस दिया। फिर उसको नीचे गिराकर कंधे पर पैर लगाकर गमछे का दूसरा राउंड गले में लपेट फंदा कस दिया। इसमें उसे कुछ मिनट लगे।

टूथ पेस्ट लगाने से फंदा कसने तक

जांच के दौरान पुलिस ने जेल परिसर में आरोपी के साथ सीन रीक्रिएशन कराया। इसमें यह भी परखा गया कि वह अकेले गमछे से फंदा कस सकता था या नहीं। पुलिस का कहना है कि रीक्रिएशन में सामने आया कि आरोपी आसानी से वारदात को उसी तरीके से अंजाम दे सकता था जैसा उसने बताया। इसी दौरान सीसीटीवी कैमरे के लेंस पर टॉयलेट की दीवार पर चढ़कर टूथपेस्ट लगाने का भी परीक्षण किया गया, जिसको पुलिस ने सम्भव पाया।

एक से डेढ़ बजे के बीच हत्या

पुलिस जांच में सामने आया कि वारदात से पहले दोपहर करीब 12 से 12:30 बजे के बीच कंपाउंडर जगन की सेल में पहुंचा था और इंजेक्शन देकर लौट गया। इसके बाद दोपहर लगभग एक से डेढ़ बजे के मध्य विष्णु ने हत्या की वारदात अंजाम दिया। इस बीच प्रहरी ने सेल में देखा लेकिन तब जगन अपने बिस्तर पर सोता दिखा जबकि वह बगल में सो रहा था। पुलिस के अनुसार दोपहर 2:54 बजे सेल दोबारा खोली गई।

ब्लॉक के बंदियों से भी होगी पूछताछ

पुलिस ने दूसरे बंदियों द्वारा उकसाने की आशंका से अभी इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि जेल में बंदियों के बीच सामान्य बातचीत या चर्चा अलग बात है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे किसी अन्य बंदी की आपराधिक भूमिका सिद्ध होती हो। हालांकि पुलिस ने न्यायालय से जगन गुर्जर के ब्लॉक में वारदात के दिन मौजूद अन्य बंदियों से पूछताछ के लिए प्रार्थना पत्र पेश किया है। कोर्ट के आदेश पर उनसे पूछताछ की जाएगी।

आरोपी ने पुलिस को ऐसे बताया पूरा घटनाक्रम

विष्णु ने सीन रीक्रिएशन में बताया कि 29 जून को दोपहर 12 बजे बाद मैं और जगन आमने-सामने बैठकर लूडो खेल रहे थे। मैं उसे दादा कहता था। लूडो खेलते-खेलते मैंने कहा 'दादा, मैं टैबलेट ले लेता हूं।' यह कहकर मैं उसके पीछे दीवार पर टंगे बैग की तरफ गया। वहां पहुंचते ही माथे पर बंधा अपना गमछा खोला और सीधे जगन गुर्जर के गले में डालकर जोर से कस दिया। जोर लगाकर उसे पीछे की ओर खींचा, जिससे वह नीचे गिर गया। फिर उसके ऊपर बैठ गया और गमछे का एक सिरा दोबारा गले में लपेटकर पूरी ताकत से दूसरी तरफ से खींच दिया। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसने करीब ढाई से तीन मिनट तक गमछे का फंदा कसकर पकड़े रखा, जिससे जगन की मौत हो गई। फिर उसे बैडशीट-गमछे से पंखे पर फंदे पर लटकाना चाहा लेकिन कामयाब नहीं होने पर बैरक में ही लेट गया।

विष्णु फिर गया हाई सिक्योरिटी जेल

पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार विष्णु का शनिवार सुबह मेडिकल करवाने के बाद कोर्ट में पेश किया। जहां से उसको न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया। नियमानुसार पुलिस ने पहले विष्णु को अजमेर सेन्ट्रल जेल में दाखिल करवाया। जहां सुरक्षा का हवाला देकर उसको हाई सिक्योरिटी जेल में ट्रांसफर कर दिया।

बाजू में गोली का जख्म नहीं भरा

थानाप्रभारी शम्भूसिंह ने आरोपी विष्णु के बाएं हाथ के कमजोर होने की चर्चाओं को खारिज किया। उन्होंने बताया कि कुलदीप जघीना हत्याकांड के दौरान विष्णु के हाथ में गोली लगी थी, जिसका समुचित उपचार नहीं होने से घाव अभी तक पूरी तरह नहीं भरा है। कभी-कभी दर्द होने पर वह दर्द निवारक दवा लेता है, लेकिन उसका हाथ पूरी तरह कार्य करने में सक्षम है और वह शारीरिक रूप से स्वस्थ है।

विष्णु के खिलाफ 7वां मुकदमा

पुलिस के अनुसार विष्णुसिंह के खिलाफ यह जगन की हत्या का सातवां आपराधिक मामला है। इससे पहले कुलदीप जघीना हत्याकांड के अलावा मारपीट 2, धोखाधड़ी के एक और दो वाहन चोरी सहित अन्य मामले दर्ज हैं।

इनका कहना है…

आरोपी विष्णु ने पुलिस पूछताछ में छींटाकशी से परेशान होकर हत्या की वारदात को अंजाम देना कबूल कर लिया है। जेल की सेल में सीन रीक्रिएशन से सबकुछ साफ हो गया है। ब्लॉक में मौजूद बंदियों के बयान के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश किया है। कोर्ट के आदेश पर बयान दर्ज किए जाएंगे।
-शम्भू सिंह शेखावत, थानाप्रभारी सिविल लाइंस थाना, अजमेर