
सोमवार को करीब 11.10 बजे अजमेर से सड़क मार्ग होते हुए कड़ी सुरक्षा के बीच राष्ट्रपति पुष्कर पहुंचे। पूरे पुष्कर कस्बे खासकर पुष्कर सरोवर के किनारे बने सभी 52 घाटों, ब्रह्मचौक से ब्रह्मा मंदिर तक चप्पे चप्पे पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई। पूजन व मंदिर दर्शन के दौरान पुष्कर सरोवर के 52 घाटों पर किसी को प्रवेश नहीं दिया गया।
वहीं ब्रह्म चौक से लेकर ब्रह्मा मंदिर तक के बाजार की दुकानें बंद करा दी गई।पूछा सरोवर के बारे में राष्ट्रपति ने पुष्कर सरोवर की विधि-विधान से पूजा के बाद पुरोहितों और स्थानीय अधिकारियों से पुष्कर सरोवर के बारे में पूछा। उन्होंने पुष्कर के पौराणिक इतिहास और धार्मिक महत्ता की जानकारी भी ली। पुरोहितों ने राष्ट्रपति को अनादिकाल की परम्परा, बही में पूर्व राष्ट्राध्यक्षों के हस्ताक्षर की परम्परा की जानकारी भी दी।
किए प्रजापिता ब्रह्मा मंदिर के दर्शन
राष्ट्रपति कोविन्द ने प्रजापिता ब्रहाा मंदिर के दर्शन भी किए। उन्होंने सीढिय़ां अधिक होने के कारण पहली सीढ़ी से ही हाथ जोड़कर प्रजापिता ब्रह्मा से देश में खुशहाली और शांति की कामना की। राष्ट्रपति को दुनिया में एकमात्र ब्रह्मा मंदिर होने की जानकारी दी गई। इसके अलावा उन्हे ब्रह्माजी की पत्नी सावित्री के मंदिर के बारे में बताया गया।
मंदिर की पहली सीढ़ी के पास ही पूजन
उपखंड अधिकारी विष्णु कुमार गोयल ने बताया कि राष्ट्रपति कोविंद ब्रह्मा मंदिर की पहली सीढ़ी के पास ही पूजन किया। इसी प्रकार से ब्रह्म घाट के मुख्य द्वार पर शंकराचार्य के मंदिर के पास ही पुष्कर सरोवर की पूजा व्यवस्था की गई। दोनो स्थानो पर सीढ़ीयां अधिक होने के कारण व्यवस्था में बदलाव किया गया है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द 14 मई को प्रात: 11 बजकर 10 मिनिट पर अजमेर से सड़क मार्ग होते हुए पुष्कर के ब्रह्म घाट पहुंचे। यहां पर घाट के मुख्य द्वार पर उनका मात्र 10 मिनिट पूजा करने का कार्यक्रम हुआ। सरोवर की पूजा के बाद दोपहर 11. 30 मिनिट पर वे ब्रह्मा मंदिर पहुंचे। इस दौरान ब्रह्म चौक से लेकर मंदिर बाजार की दुकाने बंद रहीं। ब्रह्मा मंदिर की सीढ़ीयां अधिक होनें कें कारण प्रशासन की ओर से ब्रह्मा देव की पूजा मंदिर की पहली सीढ़ी के पास पूजन की व्यवस्था की। यहां दोपहर 12 बजे तक राष्ट्रपति ने पूजा अर्चना की।
32 साल बाद राष्ट्रपति का पुष्कर दौरा
देश के प्रथम नागरिक की 32 साल के अन्तराल में पुष्कर यात्रा होगी। इससे पूर्व वर्ष 86 में तात्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह पुष्कर आए थे। हालांकि शंकरदयाल शर्मा एवं वैकटरमण भी पुष्कर आए थे लेकिन उस समय वे दोनो की उपरराष्ट्रपति पद पर थे। इस दौरान प्रधानमंत्री के रूप में अटलबिहारी वाजपेयी, चन्द्रशेखर, वी. पी. सिंह ने पुष्कर यात्रा की थी लेकिन देश के प्रथम नागरिक एवं सर्वाेच्च सेनापति की 32 साल बाद यह यात्रा होगी।
Published on:
14 May 2018 11:44 am

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