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पुष्कर चिकित्सालय में घटते चिकित्सक और स्टाफ, बढ़ते रोगी

अव्यवस्थाओं का आलम : इलाज के लिए मरीजों को झेलनी पड़ती है परेशानी

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pushkar hospital- Decreasing doctor and staff, increasing Patient

पुष्कर चिकित्सालय में घटते चिकित्सक और स्टाफ, बढ़ते रोगी

महावीर भट्ट. पुष्कर .

आसपास के करीब बीस गांवों के रोगियों को पुष्कर के राजकीय चिकित्सालय में इलाज कराने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। डॉक्टर व स्टाफ लगातार घटता जा रहा है वहीं रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। हालत यह है कि रोगी कतारबंद होकर प्राथमिक उपचार कराने को विवश हैं।
पुष्कर के राजकीय चिकित्सालय में इलाज कराने के लिए आसपास के करीब बीस गांवो के करीब पांच सौ रोगी प्रतिदिन आते हैं। इसके अलावा पुष्कर तीर्थ स्थल होने के कारण बाहर के रोगियों, दुर्घटना में घायलों का इलाज भी इसी चिकित्सालय में किया जाता है लेकिन इस चिकित्सालय में डॉक्टर रिटायर हो रहे हैं और नर्स स्टाफ, लिपिक व वार्ड बॉय के स्वीकृत पदों पर लम्बे समय से नियुक्तियां ही नही हो पाई हैं। आलम यह है कि रोगी दिनोदिन बढ़ते जा रहे हैं तथा डॉक्टर, स्टाफ घटता जा रहा है। परिणाम स्वरूप रोगियों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ रहा है। ड्रेसिंग कराने, इंजेक्शन लगवाने तथा डाक्टर को दिखाने के लिए कतारबंद होना पड़ रहा है। राज्य के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने मंत्री बनने के बाद प्रदेश के चिकित्सालयों में समुचित चिकित्सा का वादा किया था जो उनके खुद के विधानसभा क्षेत्र तक ही सिमट कर रह गया है। कस्बेवासियो की चिकित्सालय को आधुनिक बनाने की मांग पर कोई सुनवाई तक नही हुई है।

कुल पांच चिकित्सों के भरोसे

चिकित्सा पुष्कर चिकित्सालय के वर्तमान व्यवस्था पर नजर डालें तो कुल सात चिकित्सक के पद स्वीकृत हैं इनमें से दो पद रिक्त है। शिशु चिकित्सक नहीं लगाया गया है। एक चिकित्सक सेवानिवृत्त हो गया है। कुल पांच चिकित्सकों के भरोसे चिकित्सालय चल रहा है इनमें दन्त चिकित्सक, गायनिक भी शामिल है। आगामी जुलाई माह में एक विशेषज्ञ सेवानिवृत्त होने के बाद हालात और मुश्किल हो जाएंगे। इसी तरह से द्वितीय गे्रड की नर्स के 7 पद रिक्त चल रहे है। कनिष्ठ लेखाकार का काम लेखांकन से पूरी तरह से अनभिज्ञ बाबू के भरोसे कर दिया गया है।

लैब तकनीशिन और वार्ड बॉय तक नहीं

वरिष्ठ लैब तकनीशियन का पद रिक्त है। खास बात तो यह है कि रोगियों को वार्ड तक ले जाने सहित सहायक का काम करने वाले चार वार्ड बॉय के पद लम्बे समय से रिक्त चले आ रहे है। एनएचएम योजना में आठ वर्षों से कनिष्ठ लेखाकार नहीं लगाया गया है। भारी स्टाफ की कमी के बीच करीब पांच सो रोगियों की प्रतिदिन चिकित्सा करना टेढ़ी खीर साबित होता है। यहां पर राजकीय जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय से ट्रेनिंग नर्स लगाया गया है जो अधिकांश समय मोबाइल फोन पर बतिया कर ही अपनी डयूटी पूरी कर रहा है। प्रभारी डॉ. आर.के. गुप्ता की मानें तो स्टाफ की कमी को लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को कई बार अवगत कराया जा चुका है लेकिन कोई समाधान नही निकला। सत्ता परिवर्तन के बाद स्थानीय कांगे्रसियों की आंकड़े एकत्र कर स्टाफ लगाने की कवायद मात्र दिखावा साबित हुई है।

इनका कहना है
चिकित्सालय में डॉक्टर्स व स्टाफ की कमी से परेशानी हो रही है।

- डॉ. आर. के गुप्ता, प्रभारी चिकित्सालय पुष्कर