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#Raj election 2018: बीजेपी का चुनावी गणित, उतरी पुरानी रणनीति के साथ मैदान में

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BJP ticket distribution policy

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अजमेर.

भारतीय जनता पार्टी की ओर से टिकट वितरण में एक बार फिर पुरानी रणनीति को ही आजमाया गया है। अजमेर जिले की कुल आठ विधानसभा सीटों में घोषित सात सीटों में चार को रावत एवं जाट समाज के प्रतिनिधत्व में ही बांट दिया गया। उधर, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट का गुर्जर समाज में प्रभाव के चलते जिले में गुर्जर समाज से प्रभावित कुछ सीटों के बावजूद भाजपा ने प्रतिनिधित्व नहीं दिया। इसी तरह टिकट वितरण में अल्पसंख्यक वर्ग को भी नजरअंदाज किया गया है।

टिकट काटने की अपनी रणनीति में बदलाव

भाजपा की ओर से वर्तमान विधायकों के टिकट काटने की अपनी रणनीति में भी बदलाव करते हुए सात में फिलहाल एक वर्तमान विधायक का टिकट काटा गया है।भाजपा आलाकमान की ओर से रावत बाहुल्य सीट पुष्कर एवं ब्यावर में सुरेश सिंह रावत व शंकरसिंह रावत को पुन: चुनाव मैदान में उतार कर भाजपा के परंपरागत वोटबैंक पर अपना प्रभाव बनाया है।

वहीं पिछले चुनाव की तरह इस बार भी किशनगढ़ एवं नसीराबाद विधानसभा क्षेत्र में जाट समाज के युवा चेहरे विकास चौधरी एवं रामस्वरूप लांबा को चुनाव में मैदान में उतारा है। इससे पूर्व 2013 में भी भागीरथ चौधरी व सांवर लाल जाट भाजपा के उम्मीदवार रहे हैं।

फिर हावी रहा जातिगत आधार
भाजपा के टिकट वितरण में इस बार भी जातिगत आधार ही हावी रहा है। भाजपा की ओर से जिले की सात विधानसभा सीटों में रावत, जाट, के साथ सिन्धी एवं राजपूत समाज एवं अनुसूचित जाति की आरक्षित सीट पर अनिता भदेल को कोली समाज को साधते हुए टिकट दिया गया है।

ज्यादा प्रतिनिधित्व नहीं

कहीं भारी नहीं पड़ जाए पुरानी रणनीतिटिकट वितरण में पुरानी रणनीति कहीं भाजपा पर भारी भी पड़ सकती है। खासकर वैश्य, ब्राह्मण, माली, गुर्जर प्रमुख जातियों को ज्यादा प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है।