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rajasrhan ka ran: राजस्थान का मैनचेस्टर रहा है ब्यावर, ना कांग्रेस ना बीजेपी चाहती है जिला बनाना

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beawar city development

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सुनिल जैन/ब्यावर

करीब सात दशक से ब्यावर को जिला बनाने की चल रही मांग पूरी नहीं हो सकी। जबकि जल व जिले की मांग को लेकर किए गए पैदल यात्रा व आमरण अनशन को लेकर विधायक शंकरसिंह रावत चर्चा में रहे। जवाजा के 199 गांवों को बीसलपुर परियोजना से जोडऩे के लिए पांच साल पहले ही स्वीकृति व बजट मिल गया। अब तक अधिकांश गांवों में पानी नहीं पहुंच सका। कुछ गांवों में सप्लाई शुरु हुई है लेकिन यहां कम पानी ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है।

जबकि विधायक रावत ने पहले चुनाव के बाद जिले की मांग को लेकर सदन में मुखर की गई आवाज के चलते ही जनता में उनके प्रति सहानुभूति रही। यहीं सहानुभूति ने उन्हें दूसरी बार बड़े अंतराल से जीताकर विधानसभा में भिजवाया। अब यह मांग पूरी नहीं होने से विपक्ष हर मोर्च पर उन्हें घेर रहा है। चुनाव में भी जिला का मुद्दा एक बार फिर गरमाएगा। ऐसे में आने वाले चुनाव में भाजपा के सामने जिले का मुद्दा परेशानियां खड़ी करेगा। अजमेर रोड बाइपास से शहर में प्रवेश करते ही गौरव पथ के निर्माण हुआ।

कुछ मीटर तक चलने तक लगता है कि शहर में प्रवेश कर रहे है। कुछ ही देर में यह भ्रम दूर हो जाता है। डिवाइडर के बीच लगाए गए पौधे सूख गए है। इसके कुछ आगे निकलते ही सिंगल रोड शुरु हो जाता है। सडक़ के दोनों ओर जमा मिट्टी व गंदगी के चलते गाडी से खिडक़ी से बाहर मुंह तक नहीं निकाल सकते है।

सतपुलिया विस्तारीकरण का काम करीब छह माह से अटका है। यहां पर आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती है। इसके आगे बस स्टैंड से रेल पुलिस चौकी तक सडक़े मन को सुकून देती है।

इसके आगे निकलते ही अतिक्रमण की भरमार व बेतरतीब पार्किग की समस्या मुंह बाए खड़ी है। इसके अलावा सेंदड़ा रोड से बाइपास तक एवं चांगगेट से उदयपुर रोड बाइपास तक सडक़ के दोनों ओर अतिक्रमण की भरमार है। चांगगेट से जयमंदिर तक दिन में कई बार जाम लगता है। यहां पर आडे-तिरछे खड़े वाहन इस समस्या को बढ़ा देते है।

ऐसे ही चिम्मनसिंह लोढा सर्किल से लेकर सेंदडा रोड शिव मंदिर तक भी ऐसी ही बदहाली नजर आती है। इसके बावजूद स्ट्रीट वेंडर नीति सालों से लागू नहीं हो सकी है। इसको लेकर काम शुरु भी हुए। वेंडर कमेटी का गठन भी हुआ लेकिन यह सब कागजों तक सीमित रहा। शहर में ऐसी कोई सुविधा नहीं मिल सकी।

जिला ही सबसे बड़ा मुद्दा

ब्यावर विधानसभा क्षेत्र का जिला ही सबसे बड़ा मुद्दा है। जिले की मांग पूरी नहीं होने से लोगों के मन में गहरी टीस है। कांग्रेस व भाजपा दोनों ही दल की जिले की मुद्दे पर की गई अनदेखी के चलते लोगों के मन में निराशा है। अमृतकौर चिकित्सालय में आउटडोर व इनडोर में मरीजों का खासा दबाव रहता है। कई मेडिकल कॉलेज से अधिक है।

इसके बावजूद चिकित्सकों की कमी है। व्यवस्थाएं बेपटरी हो रखी है। शहर की बढ़ती आबादी व विस्तार के अनुरुप विकास का बजट नहीं मिलना भी मुद्दा है। यातायात व्यवस्था बेपटरी हो रखी है। ट्रांफिक लाइट लगाने को लेकर प्रस्ताव बनाकर भिजवाया लेकिन बजट नहीं मिल सका। इसके अलावा साकेतनगर थाने का प्रस्ताव दस साल से फाइलों में चल रहा है।

यातायात थाने का प्रस्ताव भी भिजवाया गया लेकिन इसकी मांग पूरी नहीं हो सकी। यूआईटी के गठन के नाम पर सरकार की सौ दिवसीय कार्ययोजना में यूआईटी बनाए जाने के नाम पर भाजपा ने आतिशबाजी की। मिठाईयां बाटी लेकिन मांग नहीं हो सकी पूरी।