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टीचर्स को लगने वाला है यह झटका, RBSE का यह फैसला करेगा बड़ा बदलाव

यह सभी कॉपयां प्रदेश के दूर दराज जिलों में रहने वाले परीक्षकों के घर पर भिजवाई जाती है।
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सुरेश लालवानी/अजमेर।

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान द्वारा परीक्षाओं की उत्तरपुस्तिकाएं जंचवाने के लिए परीक्षकों को घर भिजवाने की मौजूदा व्यवस्था समाप्त होगी। हालांकि इस व्यवस्था को पूरी तरह बंद होने में फिलहाल दो-तीन वर्ष लगेंगे। प्रायोगिक तौर पर प्रारंभ की गई केन्द्रीय मूल्यांकन पद्वति काफी कारगर साबित हुई है लिहाजा चरणबद्ध तरीके से मौजूदा व्यवस्था की जगह नई केन्द्रीय मूल्यांकन पद्धति पूरी तरह से लागू कर दी जाएगी।

शिक्षा बोर्ड की स्थापना के साथ ही कॉपियां जांचने के लिए परीक्षकों को उनके घर भिजवाने की व्यवस्था चल रही है। पिछले लगभग 10 वर्ष से विद्यार्थियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी और उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में लापरवाही के अनेक मामले सामने आने के बाद इस व्यवस्था का विकल्प जरूरी हो गया था। बोर्ड प्रति वर्ष लगभग एक करोड़ 20 लाख उत्तरपुस्तिकाएं जंचवाता है। यह सभी कॉपयां प्रदेश के दूर दराज जिलों में रहने वाले परीक्षकों के घर पर भिजवाई जाती है।

संवींक्षा व्यवस्था से लापरवाही उजागर

पिछले कुछ वर्षों से संवीक्षा के तहत विद्यार्थियों को उनकी उत्तरपुस्तिकाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था प्रारंभ की गई है। सूचना के अधिकार के तहत भी कॉपयां उपलब्ध होने से अब कुछ भी गोपनीय नहीं रहा है। इस व्यवस्था की बदौलत परीक्षकों द्वारा कॉपियां जांचने में की जा रही लापरवाही उजागर होने लगी है। बोर्ड परिणामों के बाद उत्तरपुस्तिकाओं की संवीक्षा के डेढ से दो लाख आवेदन आते हैं।
मिलीभगत के भी आए मामले

कुछ वर्ष पूर्व एक निजी विद्यालय संचालक द्वारा परीक्षक के घर जाकर अपने स्कूल के विद्यार्थियों को मनचाहे अंक देने के लिए प्रलोभन और धमकी देने का मामला सामने आया था। उसके बाद बोर्ड प्रशासन भी हरकत में आया । इससे पूर्व में भी परीक्षकों द्वारा घर पर कॉपियां जांचने में बरती जा रही अनियमितताओं और किसी अन्य से कॉपियां जंचवाने की भी अनेक शिकायतें सामने आई थी।

यह है केन्द्रीय मूल्यांकन व्यवस्था

इस व्यवस्था के तहत कॉपियां परीक्षको के घर भिजवाने की जगह परीक्षकों को ही एक जगह बुलाया जाता है। बेहतर माहौल में परीक्षक बिना किसी विघ्न के लगातार कॉपियां जांचते हैं। बोर्ड अधिकारियों की निगरानी में कॉपियां जंचवाने से किसी प्रकार की मिलीभगत की भी आशंका समाप्त हो जाती है। प्राप्तांक भी जल्द मिल जाने से परिणाम भी तय समय पर निकल पाते हैं।

इस साल राज्य के सभी संभागीय आयुक्त मुख्यालयों सहित नौ जगह केन्द्रीय मूल्यांकन के तहत कॉपियां जंचवाई गई। नई व्यवस्था काफी कारगर साबित हुई है। अगले साल से इसे और बढ़ाया जाएगा। कुछ वर्ष में इसे पूरी तरह से लागू किया जाएगा और परीक्षकों के घर कॉपियां भेजने की व्यवस्था बंद होगी।
-प्रो. बी. एल. चौधरी, अध्यक्ष, माशिबो राजस्थान