5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष की तरह वेकेन्ट है यह खास पद, सरकार को नहीं है कोई परवाह

स्थाई अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने पर या तो सरकार तत्काल नए अध्यक्ष की नियुक्ति करती है।
2 min read
Google source verification
Young Congress workers handed over the memorandum to RPSC

rpsc chairman

अजमेर

राजस्थान लोक सेवा आयोग अब कहने को संवैधानिक संस्था रह गया है। यहां अध्यक्ष पद अब सियासी बन चुका है। नगर निगम, यूआईटी जैसी संस्थाओं की तर्ज पर यहां अध्यक्ष तैनात करने की परम्परा चल पड़ी है। मात्र दस महीने में लगातार तीसरी बार आयोग में ऐसे हालात बने हैं।

वर्ष 1949 में राजस्थान लोक सेवा आयोग सेवा का गठन किया गया था। इसका कार्य निर्धारण राजस्थान लोक सेवा आयोग नियम एवं शर्तें 1963, राजस्थान लोक सेवा आयोग ( शर्तें एवं प्रक्रिया का मान्यकरण अध्यादेश -1975, नियम-1976) के तहत हुआ है। स्थाई अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने पर या तो सरकार तत्काल नए अध्यक्ष की नियुक्ति करती है। ऐसा नहीं होने पर राजभवन के निर्देश पर कार्मिक विभाग किसी वरिष्ठ सदस्य को कार्यभार सौंपने के आदेश जारी करता है। यह परम्परा वर्ष 2012 में डॉ. हबीब खान गौरान और उनके बाद 2014 में कार्यवाहक अध्यक्ष बने डॉ. आर. डी. सैनी तक चलती रही। लेकिन इसके बाद आयोग की परम्पराएं और व्यवस्थाएं सिर्फ औपचारिक रह गईं।

पिछले साल बदली व्यवस्था

वर्ष 2015 में अध्यक्ष बने डॉ. ललित के पंवार का कार्यकाल बीते साल 10 जुलाई को खत्म हुआ। सरकार के स्तर पर यहीं से आयोग की संवैधानिक व्यवस्था में बदलाव हुआ। डॉ. पंवार बिना किसी को कार्यभार दिए पद त्याग (रिलेंक्विश) कर चले गए। हालांकि सरकार ने उसी दिन तत्कालीन सदस्य श्याम सुंदर शर्मा को स्थाई अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। लेकिन शर्मा का कार्यकाल 28 सितम्बर 2017 को खत्म हो गया। शर्मा भी पंवार फार्मूले को अपनाते पद त्याग कर चले गए। इसके बाद 29 सितम्बर से 17 दिसम्बर तक आयोग में ना स्थाई ना कोई कार्यवाहक अध्यक्ष रहा।

संवैधानिक पद को बनाया सियासी

सरकार, राजभवन की तर्ज पर आयोग को सदैव संवैधानिक संस्था माना गया है। इसके गठन के बाद से अध्यक्ष पद कभी खाली नहीं रहा। लेकिन सरकार ने इसे नगर निगम, यूआईटी और अन्य बोर्ड की तरह सियासी संस्था बना दिया है। सरकार अपने पंसदीदा को ही अध्यक्ष बनाने को तरजीह देती है। कुसी खाली रहने सहित भर्तियां प्रभावित हों, लेकिन सरकार को इससे कतई इत्तेफाक नहीं है।

अब तक यह रहे अध्यक्ष

एस. सी. त्रिपाठी, डी. एस. तिवारी, एम.एम. वर्मा, एल.एल. जोशी, वी. वी. नार्लिकर, आर. सी. चौधरी, बी. डी. माथुर, आर. एस. कपूर, मोहम्मद याकूब, एच. डी. गुप्ता, आर. एस. चौहान, एस. अडियप्पा, दीनदयाल, जे. एम. खान, एस. सी. सिंगारिया (कार्यवाहक), यतींद्र सिंह, हनुमान प्रसाद, पी. एस. यादव, देवेंद्र सिंह, एन. के. बैरवा, जी. एस. टाक, एच. एन. मीना (कार्यवाहक), सी. आर. चौधरी, एम. एल. कुमावत, प्रो. बी. एम. शर्मा, डॉ. हबीब खान गौरान, डॉ. आर.डी. सैनी (कार्यवाहक), डॉ. ललित के पंवार, श्याम सुंदर शर्मा और डॉ. आर. एस. गर्ग

यूं बनता है पूरा आयोग

राजस्थान लोक सेवा आयोग में 1 अध्यक्ष और सात सदस्य होते हैं। इसे फुल कमीशन कहा जाता है। आरएएस एवं अधीनस्थ सेवा सहित अन्य भर्ती परीक्षाओं के परिणाम, भर्तियों से जुड़े नियम, किसी परीक्षा या साक्षात्कार को स्थगित करने के फैसले फुल कमीशन की बैठक में होते हैं।

लेना पड़ता है यह फैसला....

आयोग में सालभर भर्ती परीक्षाएं या साक्षात्कार जारी रहतें हैं। नियमानुसार स्थाई या कार्यवाहक अध्यक्ष ही साक्षात्कार बोर्ड तय कर सकते हैं। सरकार द्वारा अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं करने पर फुल कमीशन की बैठक बुलाई जाती है। इसमें सर्वसम्मति से वरिष्ठतम या अन्य किसी सदस्य को व्यवस्थाएं बनाए रखने और साक्षात्कार बोर्ड तय करने के लिए अधिकृत किया जाता है।