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हजारों अभ्यर्थियों के लिए खास खबर…वरिष्ठ अध्यापक प्रतियोगी परीक्षा 28 अक्टूबर से

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अजमेर

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raktim tiwari

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Updated: 23 Sep 2018, 8:45 AM IST

राजस्थान विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षा 2019 के लिए आवेदन प्रक्रिया आज से शुरू	ro

राजस्थान विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षा 2019 के लिए आवेदन प्रक्रिया आज से शुरू ro

अजमेर.

राजस्थान लोक सेवा आयोग ने वरिष्ठ अध्यापक (माध्यमिक शिक्षा) प्रतियोगी परीक्षा-2018 की तिथियां घोषित कर दी हैं। विषयवार परीक्षा 28 अक्टूबर से 2 नवम्बर तक चलेंगी।

सचिव पी. सी. बेरवाल ने बताया कि वरिष्ठ अध्यापक (माध्यमिक शिक्षा) प्रतियोगी परीक्षा-2018 के समूह-ए के तहत 28 अक्टूबर को सुबह 10 से 12 बजे तक सामान्य ज्ञान की परीक्षा होगी। 29 अक्टूबर को सुबह 9 से 11.30 बजे सामाजिक विज्ञान, दोपहर 3 से 5.30 बजे गणित की परीक्षा होगी।

30 अक्टूबर को सुबह 9 से 11.30 बजे अंग्रेजी, दोपहर 3 से 5.30 बजे पंजाबी और सिंधी विषय की परीक्षा होगी। इसी तरह समूह-बी के तहत 31 अक्टूबर को सुबह 10 से 12 बजे सामान्य ज्ञान विषय की परीक्षा होगी। 1 नवम्बर को सुबह 9 से 11.30 बजे हिंदी, दोपहर 3 से 5.30 बजे विज्ञान तथा 2 नवम्बर को सुबह 9 से 11.30 बजे संस्कृत और दोपहर 3 से 5.30 बजे उर्दू विषय की परीक्षा होगी।

भ्रष्टाचार के बढ़ते कदमों को नहीं रोक पाया

यूं तो ईमानदारी को किसी पैमाने से नहीं मापा जा सकता। विचारों, संस्कारों और शिक्षा-दीक्षा के बूते व्यक्ति में इसका बीजारोपण होता है। कई लोग अपने ईमानदारी के बूते ही जाने-पहचाने जाते हैं। देश-प्रदेश और दफ्तरों उनके कामकाज के चर्चे होते हैं। लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू भी है, जिसे भ्रष्टाचार कहा जाता है। कालेधन की यह अमरबेल साल दर साल फल-फूल रही है। नोटबंदी जैसा क्रांतिकारी कदम भी भ्रष्टाचार के बढ़ते कदमों को नहीं रोक पाया है।

अजमेर में आयकर विभाग के अफसरों ने कुछ कारोबारियों के घरों-प्रतिष्ठानों में तीन लॉकर-बैंक खाते खंगाले। कारोबारियों के यहां लाखों-करोड़ों रुपए नकद और अघोषित सम्पत्ति मिली। कुछ ‘सम्पत्ति ’ का तो हिसाब-किताब भी नही मिला। एक अफसर तो कार में लाखों के कैश और महंगे मोबाइल के साथ पकड़ गए। इससे पहले एक जज और पुलिस महकमे के अफसर काले कारनामा करने से नहीं चूके। ब्यावर में तो जनता की सेवक और नगर परिषद अध्यक्ष ही रुपए लेते रंगे हाथ पकड़ गई। जयपुर में एक महिला पुलिसकर्मी रिश्वत में लाखों रुपए मांग बैठी। ऐसे मामले प्रदेश के जोधपुर, अलवर, बीकानेर, उदयपुर या किसी अन्य शहर में भी लगातार उजागर होते रहे हैं।

अगर अफसरों-कर्मचारियों की बात करें तो केंद्र और राज्य सरकार से उन्हें अच्छी खासी पगार मिल रही है। सातवां वेतनमान लागू होने के बाद तो तनख्वाह जबरदस्त बढ़ चुकी है। फिर भी कई अफसरों-कार्मिकों का ऊपरी कमाई से मोहभंग नहीं हुआ है। कई दफ्तरों में खास कार्मिकों को मलाईदार सीट पर बैठाया जाता है। लेन-देन में अफसरों और साहब का ध्यान रखना इनकी पहली प्राथमिकता होती है। काली कमाई वसूलने और उसे ठिकाने तक पहुंचाने में इनका अहम योगदान रहता है। दो साल पहले