
scrap material in mdsu
अजमेर.
नए निर्माण और भवनों की मरम्मत में भले महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय आगे हो, लेकिन उसे पुराने कबाड़ की परवाह नहीं है। यहां लाखों का कबाड़ धूल खा रहा है। इनमें सिरेमिक, लकड़ी और लोहे के सामान शामिल है। कबाड़ बेचने से प्रशासन को लाखों रुपए की आय हो सकती है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय बेफिक्र है।
31 साल पहले स्थापित विश्वविद्यालय में लगातार नए भवनों का निर्माण और पुराने भवनों की मरम्मत जारी है। पिछले दो-तीन साल में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान में विश्वविद्यालय को 10 करोड़ रुपए मिले हैं। इस राशि से कणाद भवन, महाराणा प्रताप भवन, चाणक्य भवन, महर्षि वाल्मीकि भवन, कुलपति सचिवालय, विक्रमादित्य भवन और अन्य स्थानों पर मरम्मत कराई गई है। पुराने लकड़ी-लोहे के दरवाजों, एंगल, सिरेमिक पॉट, वाशबेसिन, टाइल्स के जगह नया सामान लगाया गया है। पुराने कबाड़ को प्रशासन ने सहायक अभियंता कार्यालय के पीछे बने गोदाम और खुले में पटक दिया है।
खराब हो रहा पुराना सामान-कबाड़
कबाड़ और पुराना सामान खुले में खराब हो रहा है। बरसात, सर्दी और धूप के चलते लोहे की सामग्री पर जंग लग चुका है। सागवान और शीशम की लकड़ी के दरवाजों पर भी खराब होने लगे हैं। पुराने सामान से परिसर में गंदगी हो रही है। प्रशासनिक स्तर पर इसकी नीलाम नहीं हो रही। इसके अलावा पुरानी कैंटीन और अन्य जगह भी पुराना सामान बंद पड़ा है।
सामान की नहीं जानकारी...
पुराने कबाड़ के स्टॉक की विश्वविद्यालय को जानकारी नहीं है। गोदाम में कांच की ट्यूबलाइट, बल्ब, खिड़कियों के टूटे कांच, पाइप, लोहे के पुराने बोर्ड भी पड़े हैं। नीलामी की प्रक्रिया के लिए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन, सामान का भौतिक मूल्यांकन, निविदा आमंत्रण जैसे तकनीकी पहलुओं पर विचार किया जाना है। प्रशासन ने नीलामी को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की है।
Published on:
05 Mar 2019 06:33 am
