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यौन शोषण प्रकरण…जबरदस्त पॉलीटिकल कनेक्शन है इस इंस्टीट्यूट का, जुटे मामला दबाने में

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sexual harresment case

sexual harresment case

अजमेर.

छात्र यौनशोषण व रैगिंग प्रकरण में पुलिस और नामचीन शिक्षण संस्थान (कॉलेज) सोलह दिन बाद भी नतीजे पर नहीं पहुंच सके। अनुसंधान के नाम पर पुलिस भी प्रकरण को लम्बा खींच रही है जबकि मामले में पीडि़त के बयान के साथ संस्थान से सीसीटीवी फुटेज व अन्य कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।

प्रकरण दिन-पेदिन लम्बा खींचता चला जा रहा है। अलवर गेट थाने में प्रकरण दर्ज होने के 16 दिन बाद भी पुलिस की जांच नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। पुलिस तफ्तीश संस्थान के भीतर प्रबंधन, कर्मचारी, सुरक्षा अधिकारी व हाउस मास्टर के ईदगिर्द घूम रही है। अनुसंधान अधिकारी की माने तो प्रकरण में पड़ताल लगभग पूरी हो चुकी है। पीडि़त छात्र ने शिकायत और बयान में भी संस्थान के भीतर रैगिंग की बात कही है।

संस्थान की ओर से चुप्पी
खास बात यह है कि प्रकरण में आन्तरिक कमेटी के गठन व कथिततौर पर छात्र के बयान को मनमाने ढंग से दर्ज करने व विरोध पर उसे नष्ट करने की कार्रवाई ने संस्थान प्रबंधन की मंशा को स्पष्ट कर दिया है। अब मामले में पुलिस अनुसंधान व उसकी रिपोर्ट पर पीडि़त छात्र और उसके परिवार की उम्मीदे टिकी हुई है।

सीयूआर ने पेश की नजीर

राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय बान्दरसिन्दरी में छात्र के साथ रैगिंग के नाम पर यौनशोषण का मामला सामने आया। इसमें विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रकरण उजागर होने के दो दिन बाद ही आरोपित छात्र को ढूंढ निकाला। उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाए बगैर विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया।

प्रकरण में तफ्तीश लगभग पूरी हो चुकी है। कुछ लोगों के बयान बाकी है। पीडि़त ने अपने बयानों और रिपोर्ट में रैगिंग की बात कही है। अनुसंधान में भी कुछ बाते सामने आई है। जो अनुसंधान पूरा होने के बाद अदालत के समक्ष रखी जाएगी।

-गजेन्द्र सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक व सीओ साउथ

अचानक गायब हो गई थी रोडवेज की पांच बस....

राजस्थान पथ परिवहन निगम के 5 सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया भुगतान के मामले में चार दिन पूर्व सीज की पांच बसों को अजमेर तहसीलदार ने रिलीज कर दिया। यह कार्रवाई रोडवेज की हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका पर दिए गए निर्णय के बाद की गई।