
उर्स में रहमत के साथ बरकत की आस में देशभर से आते हैं दुकानदार, राहुल के पास दुकान लगाता है शाहरूख
अजमेर. उर्स के दौरान ख्वाजा के दर पर बड़ी संख्या में जायरीन तो आते ही हैं, साथ ही व्यापार के लिहाज से भी दूरदराज के लोगों को उर्स का इंतजार रहता है। उर्स में किसी ने यूपी से आकर दुकान लगाई है तो मुंबई वालों ने भी स्टॉल लगा रखी है। धौलपुर और जयपुर से भी लोग दुकानें लगाने आते हैं। अलग-अलग जगहों से आए दुकानदारों के कारण उर्स के दौरान बाजार मिनी इंडिया जैसा नजारा पेश करते हैं। दुकानदारों का मानना है कि उर्स में ख्वाजा की रहमत के साथ ही व्यापार में बरकत भी बरसती है।
यूपी के रबी का ठेले पर चूरन
रबी अहमद यूपी- सीतापुर का निवासी है। गंज में टैम्पो स्टैण्ड के पास ठेला लगाकर चूरन बेचता है। रबी ने बताया कि कई वर्षों से उर्स में बड़ा भाई रफी अहमद आता है। इससे पहले वालिद आते थे। पांच से सात दिन यहां रहते हैं। बड़े कुल की रस्म के बाद यहां से चले जाते हैं।
मुंबई के सलीम की छतरी में टोपियां
मोहम्मद सलीम मुंबई के रहने वाले हैं। वहां स्टॉल लगाकर सामान बेचते हैं। किसी दोस्त ने अजमेर के उर्स में धंधा करने की सलाह दी तो टोपियां लेकर अजमेर आ गए। यहां जगह की तलाश की। किराया बहुत ज्यादा लगा। इसके चलते छाते में टोपियां रखकर बेचने लगे। सलीम ने बताया कि पहली बार आया हूं। लोग भाव बहुत कम कराते हैं। ख्वाजा साहब बुलाएंगे तो फिर आएंगे।
राहुल चावल पर लिखता है नाम
धौलपुर का राहुल सिंह कई वर्षों से अजमेर आ रहा है। उर्स के दौरान दस दिन तक चाबियों के नाम वाले छल्ले बेचता है। चावल पर नाम भी लिखता है। राहुल ने बताया कि वो देशभर के मेलों, प्रदर्शनी में दुकान लगाता है। उर्स की छठी व्यापार के हिसाब से बड़ा दिन होता है। सात दिन में कई माह का व्यापार हो जाता है। लेकिन इस बार बारिश ने व्यापार को धो दिया।
दुकान में ही रहता है शाहरूख
शाहरूख खान और शेख अपने दोस्तों के साथ जयपुर से हर साल उर्स में अजमेर आता है। गंज घाटी से दिल्ली गेट की ओर जाने वाले रास्ते पर दुपट्टे लगाते हैं। माल की रखवाली के लिए दो लोग दुकान में ही रहते हैं। उर्स से पहले खरीदारी करते हैं। शाहरूख ने बताया कि छठी तक करीब 80 प्रतिशत व्यापार हो जाता है। लेकिन इस बार बारिश के चलते कम बिक्री हुई।
Published on:
31 Jan 2023 07:22 pm
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