सीडब्ल्यूसी ने समझाइश और पुलिस की मदद से दो बालकों के किए पुनर्वास के प्रयास
मनीष कुमार सिंह
अजमेर(Ajmer News). रिश्तों की डोर कभी-कभी इतनी उलझ जाती है कि मां-बच्चे का अटूट बंधन भी टूटता सा नज़र आता है। ऐसे ही दो मार्मिक मामले सामने आए, जहां ममता पर परिस्थितियां भारी पड़ती दिखीं। एक ओर जहां पश्चिम बंगाल से अजमेर पहुंचे विमंदित बालक को उसके परिजन ने अपनाने से इनकार कर दिया। वहीं दूसरी ओर एक मां ने नए वैवाहिक जीवन की खातिर अपने जिगर के टुकड़े से दूरियां बना ली। दोनों ही घटनाएं दिल को झकझोर देने वाली हैं, लेकिन अंत में मानवीय संवेदनाओं की जीत हुई। बेटे के आंसू और मिन्नतों से पत्थर दिल भी पसीज गए।
पश्चिम बंगाल 24 परगना से लापता हुआ 13 वर्षीय बालक 11 मार्च को अजमेर रेलवे स्टेशन पर चाइल्ड हेल्प लाइन को भटकता मिला। उसको बाल कल्याण समिति अध्यक्ष अंजली शर्मा ने काउंसलिंग के पश्चात शेल्टर होम भेज दिया। उसके माता-पिता की तलाश शुरू की तो पश्चिम बंगाल 24 परगना के नरेन्द्रपुर थाने में 12 फरवरी को गुमशुदगी दर्ज थी। परिजन से सम्पर्क हुआ तो उन्होंने बालक को लेने आने से इन्कार कर दिया। बाल कल्याण समिति की काफी जद्दोजहद के बाद भी परिजन बालक को लेने नहीं आए। बुधवार सुबह पश्चिम बंगाल नरेन्द्रपुर थाने से सहायक उपनिरीक्षक एस.के.शाह आलम व महिला कांस्टेबल अजमेर आए। सीडब्ल्यूसी ने बालक को पुलिस के सुपुर्द कर दिया।
एएसआई एस.के.शाह आलम ने बताया कि बालक आंशिक रूप से विमंदित है। उन्होंने परिजन को बालक के अजमेर में मिलने और साथ लाने के काफी प्रयास किए लेकिन उन्होंने आने से इनकार कर दिया। अब पुलिस बालक को पश्चिम बंगाल 24 परगना जिले की सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश करेगी। ताकि बालक का पुनर्वास हो सके।
गुजरात, पालनपुर से मां की तलाश में आए 14 वर्षीय बालक की मौसी बुधवार को अजमेर पहुंची। सीडब्ल्यूसी के सामने मौसी ने पहले तो बालक की मां का पता बताने से मना कर दिया। सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष अंजली शर्मा ने रामगंज थाना पुलिस की मदद ली तो उसने ना केवल बालक की उसकी मां से बात करवाई बल्कि उसे बाल कल्याण समिति कार्यालय बुलवा लिया। सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष अंजली शर्मा, सदस्य तब्स्सुम बानो और अरविन्द कुमार मीणा के सामने मां ने भी बेटे को साथ रखने से इनकार कर दिया। करीब डेढ़ से दो घण्टे तक किशोर बिलखते हुए मां से साथ रहने की मिन्नतें करता रहा। मां व मौसी ने उसकी गलतियां गिनाते हुए साथ में रखने से इन्कार कर दिया। सीडब्ल्यूसी सदस्य की समझाइश के बाद मां नाबालिग बेटे को साथ रखने को सहमत हुई।
पत्रिका से बातचीत में बालक की मां ने बताया कि जब बेटा 6 माह का था तब पति की अकाल मृत्यु हो गई। पीहर में बूढ़े माता-पिता की सेवा कर बेटे का लालन-पालन किया लेकिन वह पढ़ने लिखने की उम्र में गलत संगत में पड़ गया। परिजन की मृत्यु के बाद वह बेटे को लेकर गुजरात के पालनपुर में छोटी बहन के पास चली गई। दो माह पहले बहन ने अजमेर दौराई निवासी युवक से दूसरा विवाह कराया। उसने बेटे को छोटी बहन की देखरेख में छोड़ दिया लेकिन वह वहां से भाग आया। वह बेटे के फेर में अपना वैवाहिक जीवन बिगाड़ना नहीं चाहती है।
इधर किशोर की मां के दूसरे ससुराल पक्ष ने भी बालक को साथ रखने की सहमति दे दी। बालक ने भी मां से गलत संगति व बुरी आदतें छोड़ पढ़ाई करने का वादा किया। मां-बेटे ने सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष अंजली शर्मा व सदस्य तबस्सुम बानो के समक्ष गिले शिकवे दूर किए। इसके बाद सीडब्ल्यूसी ने मां-बेटे को साथ घर भेज दिया।
आमतौर पर देखने में आया कि बच्चों की परवरिश में गिरावट आई है। बच्चे के राह भटकने पर समझाने के बजाए उसे ठुकरा देना गलत है। पश्चिम बंगाल व गुजरात से आए दोनों बालकों का पुनर्वास करवाया गया है। दोनों मामले में मां उन्हें अपनाना नहीं चाह रही थी। समझाइश के बाद प्रकरणों का निस्तारण करवाया गया है।-अंजली शर्मा, अध्यक्ष सीडब्ल्यूसी, अजमेर