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इंतजार में पथरा गई इनकी आंखें, आप भी पढ़ें यह दर्द भर कहानी…..

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इंतजार में पथरा गई इनकी आंखें, आप भी पढ़ें यह दर्द भर कहानी.....

first year admission case

अजमेर.

विद्यार्थियों को प्रदेश के लॉ कॉलेज में प्रथम वर्ष के दाखिलों का इंतजार है। मौजूदा सत्र के 117 दिन बीतने के बावजूद सरकार और बार कौंसिल ऑफ इंडिया मामले को टाले हुए हैं। इसका खामियाजा विद्यार्थी भुगत रहे हैं।

अजमेर सहित नागौर, सीकर, सिरोही, बूंदी और अन्य लॉ कॉलेज में प्रथम वर्ष के दाखिलों पर तलवार लटकी हुई है। केंद्रीय विधि राज्यमंत्री पी. पी. चौधरी की दखल से केवल पाली के लॉ कॉलेज को प्रवेश की अनुमति मिली है।अन्य कॉलेज पर कॉलेज शिक्षा निदेशालय ने हमेशा की तरह बार कौंसिल ऑफ इंडिया की मंजूरी के बगैर दाखिले नहीं करने की शर्त लगाई है। इससे सबकी परेशानी बढ़ी हुई है।

13 साल बाद मिले शिक्षक
बीसीआई ने कॉलेजों में सीमित संसाधन और शिक्षकों को कमी को देखते हुए सरकार से 30 अप्रेल तक अंडर टेकिंग मांगी थी। यह अवधि खत्म हुए पांच महीने गुजर गए हैं, लेकिन कोई राह नहीं निकल पाई है। अलबत्ता सरकार ने लॉ कॉलेज में तीन-तीन व्याख्याता जरूर लगाए हैं। किसी कॉलेज में शारीरिक शिक्षक, खेल मैदान, सभागार, और अन्य सुविधाएं नहीं हैं।

बीसीआई-सरकार आमने-सामने
संसाधनों की कमियां पूरा करने के लिए सरकार ने पिछले सत्र में बीसीआई को अंडर टेकिंग दी थी। यह परेशानियां अब तक कायम हैं। कमियां पूरी हुए बिना बीसीआई प्रवेश की मंजूरी देने को तैयार नहीं है। वहीं सरकार बार कौंसिल को कोई जवाब भेजना नहीं चाहती। तीन साल की स्वायतत्ता भी अटकी हुई है। सरकार और विश्वविद्यालय कोई फैसला नहीं ले पाए हैं। जहां विश्वविद्यालय अपनी स्वायतत्ता छोडऩा नहीं चाहते। वहीं सरकार इस मुद्दे को कॉलेज और विश्वविद्यालय के बीच मानते हुए दूरी बनाए हुए है।

फैक्ट फाइल
राज्य में सरकारी लॉ कॉलेज : 15
स्थापना : 2005-06
स्थायी मान्यता: किसी कॉलेज को नहीं
विद्यार्थियों की संख्या-करीब 15 हजार
सरकार से अनुदान : कुछ नहीं

प्रथम वर्ष में दाखिलों के लिए बीसीआई की अनुमति से ही हो सकते हैं। सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय द्वारा तीन साल की सम्बद्धता देने की जानकारी मिली है। इस बारे में सरकार और मदस विश्वविद्यालय ही फैसला ले सकते हैं।
डॉ. डी. के. सिंह प्राचार्य लॉ कॉलेज