पावरलूम उद्योग : पैकेज का ‘आक्सीजन ’ मिले तो फिर से लौटगा दम!

राजस्थान के पावरलूम उद्यमियों को राज्य सरकार के बजट से उम्मीदें :
प्रदेश के ब्यावर, किशगढ़,जयपुर और पाली में संचालित कई पावरलूम, लागत अधिक और आय कम होने से कारोबार हो रहा ठप,बिजली महंगी होने व व्यावसायिक प्रतिस्पद्र्धा से बदहाल पावरलूम उधोग अन्य राज्यों से पिछड़े

Suresh Bharti

20 Feb 2020, 01:27 AM IST

ajmer. अजमेर. राजस्थान के पावरलूम उद्योग को राज्य सरकार के इस साल के बजट से मदद से काफी उम्मीदें है। यदि विशेष पैकेज या अन्य कोई सहायता नहीं मिली तो यहां के उद्यमी देश के दूसरे राजयों में पलायन को मजबूर हो जाएंगे। powerloom industry of Rajasthan

व्यावसायिक प्रतिस्पद्र्धा, लागत अधिक व खपत कम होने से पावरलूम उद्यमियों को कई दिक्कतें हो रही है। आर्थिक मंदी भी कोढ़ में खाज का काम कर रही है। पावरलूम कारोबार से जुड़े उद्यमियों के अनुसार इस व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार के बजट में विशेष पैकेज की आवश्यकता है। उसके बाद बेदम यह उद्योग फिर से उठ खड़ा हो सकेगा। साथ में हजारों बेरोजगारों को भी रोजीरोट मिल पाएगी।

किशनगढ़ की पन्द्रह फीसदी लूमें बंद

किशनगढ़ शहर और आसपास के इलाके में पावरलूम उद्योग मंदी की चपेट में है। किशनगढ़ के कृष्णापुरी, आजाद नगर, महावीर कॉलोनी, सुभाष कॉलोनी, पुराना शहर, दांता, गेगल, खोड़ा गणेश रोड आदि स्थानों पर लगभग 5000 लूम स्थित है। इनमें केवल ५० प्रतिशत ही पूरी क्षमता से संचालित हो रही है। ३५ प्रतिशत इकाईयां १२ से 16 घंटे ही संचालित है। 15 प्रतिशत लूमे तो बंद पड़ी है।

यह पैकेज मिले तो होगा फायदा

पावरलूम उद्योग की कई समस्याओं का अभी तक समाधान नहीं हुआ है। इनमें अलग से रीको क्षेत्र नहीं मिलना, महंगी बिजली दरें, यार्न के भावों में उतार-चढ़ाव, अनुदान और प्रोत्साहन की कमी, बुनियादी सुविधाओं का अभाव आदि है।

केंद्र सरकार की तरह नई मशीनरी पर अनुदान, सोलर को प्रोत्साहन, कम दाम पर औद्योगिक भूखंड आदि पैकेज में शामिल किए जाएं तो किशनगढ़ में नए उद्योग लगने शुरू हो जाएंगे।

ब्यावर, जयपुर और पाली में संचालित कई पावरलूम

powerloom industry of Rajasthan राज्य में ब्यावर, जयपुर और पाली में भी पावरलूम उधोग संचालित है। ब्यावर में लगभग 1000 लूम, जयपुर के कालाडेरा क्षेत्र में लगभग १५० और पाली में भी लगभग १७५ लूम संचालित हैं। राज्य महंगी बिजली से परेशान उद्यमी गुजरात और महाराष्ट्र जाकर निवेश करने को मजबूर हैं।

महंगी बिजली ने काटी जेब

पावरलूम क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी परेशानी महंगी बिजली भी है। वर्तमान में पावरलूम क्षेत्र को बिजली की दर लगभग ८ रुपए यूनिट मिल रही है जो दक्षिण एवं अन्य राज्यों से अधिक है। इससे राज्य के पावरलूम क्षेत्र को लागत बढने के चलते कड़ी प्रतिस्पद्र्धा झेलनी पड़ रही है।

दक्षिणी राज्यों से आने वाला कपड़ा राजस्थान में सस्ता बिक रहा है। इससे किशनगढ़ के पावरलूम का कपड़ा बाजार में पर्याप्त रूप से खपत नहीं हो पा रहा। राजस्थान में पावरलूम के लिए विद्युत दरें अन्य राज्यों की तुलना में ढाई गुना अधिक है। वहीं किशनगढ़ शहर की पावरलूम यूनिटों को विद्युत ट्रिपिंग और कटौती की परेशानी से भी जूझना पड़ रहा है।

हजारों श्रमिकों को रोजगार देने की क्षमता

किशनगढ़ के पावरलूम उधोग को प्रोत्साहित किया जाए तो यहां हजारों लोगों को रोजगार मिल सकता है। व्यावसायिक मंदी के चलते कई श्रमिकों की छंटनी हो गई। नए मजदूर नहीं लगाए जा रहे। वर्तमान में करीब १००० लूमे बंद पड़ी है। इसके चलते सैंकड़ों मजदूर बेरोजगार हो गए।

इनका कहना है

पावरलूम क्षेत्र को पावर सब्सिडी की आवश्यकता है। अन्य राज्यों में बिजली की दरें काफी कम हैं। तमिलनाडू, उत्तरप्रदेश महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, कर्नाटक व गुजरात में पावरलूम उधोग को काफी प्रोत्साहन दिया गया है। यदि राजस्थान में भी ऐसा किया जाए दम तोड़ते पावरलूम कारोबार की सांसें फिर से चल सकेगी।

श्रीगोपाल सोनी, अध्यक्ष राजस्थान पावरलूम एसोसिएशन, किशनगढ़।

- पावरलूम क्षेत्र को प्रोत्साहन के लिए पैकेज की आवश्यकता है। अन्य राज्यों की तरह मशीनरी, जमीन, सोलर प्लांट आदि पर अनुदान और प्रोत्साहन दिए जाएं तो नया निवेश भी होगा। साथ में रोजगार भी सृजित होंगे।

नवीन सुराणा, सचिव, राजस्थान पावरलूम एसोसिएशन, किशनगढ़।

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