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प्रमुख आस्था स्थल हैं शहर में स्थित मराठा काल के महादेव मंदिर

सैकडो़ं साल पुराना है नगर के शिव मंदिरों का इतिहास, महाशिवरात्रि की तैयारियां शुरू

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अजमेर

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Amit Kakra

Feb 14, 2023

प्रमुख आस्था स्थल हैं शहर में स्थित मराठा काल के महादेव मंदिर

प्रमुख आस्था स्थल हैं शहर में स्थित मराठा काल के महादेव मंदिर

अजमेर. मराठा काल में लंबे समय तक मराठा शासकों के अधीन रहे अजमेर में महादेव मंदिरों ंकी अलग ही महत्ता और मान्यता रही है। मराठा काल में यहां कई शिव मंदिरों का निर्माण हुआ। जिन पर दशकों से भक्त उमड़ते हैं। कहीं शिवजी पहाड़ों पर विराजित हैं तो कहीं बगीचे में बिराजे हैं। शहरी परकोटे के आसपास के इलाकों पर भी भोलेनाथ की छत्रछाया है। शहर के महादेव मंदिरों में इन दिनों शिवरात्रि महोत्सव की तैयारियां की जा रही हैं।

राजराजेश्वर महादेव मंदिर

कोतवाली गेट के पास स्थित राजराजेश्वर महादेव मंदिर मराठाकाल का है। नर्बदा नदी क्षेत्र से लाकर यहां स्थापित किए गए शिवलिंग के कारण इसकी नर्बदेश्वर नाम से भी पहचान है। मंदिर में शिव प्रतिमा के पास ही मां पार्वती की चार भुजाओं वाली प्रतिमा स्थापित है। पुजारी बाबूलाल दाधीच ने बताया कि इस मंदिर में वैवाहिक बाधाएं दूर होने की मान्यता है। पुराने समय में लोग शासन में अटके कार्यों के लिए यहां अर्जी लगाते थे। इसलिए राजराजेश्वर महादेव कहते हैं।

शांतेश्वर महादेव

मदारगेट स्थित श्री शांतेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना मराठा शासनकाल में हुई थी। शिवभक्त शांताराव मराठा द्वारा सैकड़ों साल पहले निर्मित मंदिर को उन्हीं के नाम से जाना जाता है। तत्कालीन मराठा शासक और राज्य अधिकारी यहां पूजा करने आया करते थे। पुजारी कुलदीप शुक्ला के अनुसार पुराने समय से ही यह मंदिर लोगों की आस्था का केन्द्र रहा है।

झरनेश्वर महादेव

अरावली की पहाडि़यों के बीच में झरनेश्वर महादेव का वास है। यहां सावन में झरने बहने के कारण पहचान झरनेश्वर महादेव के रूप में स्थापित हुई। इस मंदिर में महादेव बालरूप में हैं। प्रदोष और छठ को महादेव के दुग्धधारा व सहस्त्रधारा की जाती है। पूर्णिमा पर जागरण होता है। झरनेश्वर महादेव सेवा समिति के महेश अग्रवाल के अनुसार यहां बहते झरने से पूरे साल आने वाला जल कुण्ड में संचित किया जाता है। इसी पानी से सहस्त्रधारा सहित अन्य आयोजनों में इसी कुण्ड से पानी लिया जाता है।

कामेश्वर महादेव मंदिर

मराठा अधिकारी शिवभक्त राव दौलत द्वारा निर्मित दौलतबाग के बीच में उन्हीं के द्वारा शिव मंदिर बनवाने के साथ ही मंदिर के पास ही कुआं भी खुदवाया गया था। दौलतबाग के शिव मंदिर की पहचान कामेश्वर महादेव के नाम से है। हर माह प्रदोष में यहां विशेष पूजा होती थी। शिवरात्रि और श्रावण माह उत्सव भी यहां धूमधाम से मनो जाते रहे हैं।

ऋण मुक्तेश्वर महादेव

फव्वारा सर्किल स्थित ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर की भी बड़ी मान्यता है। गत तीन दशकों से मंदिर में शिवरात्रि के अवसर पर रात्रि में भी चार प्रहर की आरती की जाती है। मंदिर पुजारी दिनेश यादव के अनुसार मंदिर में श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परेशानी, आर्थिक पीड़ा-ऋण मुक्ति की प्रार्थना लेकर आते हैं, मनौती मांगते हैं।

jharneshwar mahadev ajmer