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आक्सीजन की जगह प्रदूषण रूपी जहर निगल रहे माखुपुरा के बाशिंदे

खतरे में दस हजार आबादी : त्वचा व दमा रोगियों की संख्या बढ़ी, धुआं, धूलकण, दुर्गंध व कोलाहल से हजारों लोग रहने लगे बीमार,ट्रेचिंग ग्राउंड,औद्योगिक क्षेत्र तथा खनन इलाका भी वजह

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The residents of Makhapura are swallowing poison like poison instead

माखुपुरा समीप एक कारखाने में गिट्टी कटिंग के दौरान उड़ती डस्ट।,नगर निगम,अजमेर का ट्रेचिंग ग्राउंड जो दुर्गंध की मुख्य वजह है। साथ में कचरा जलाने से खतरनाक कैमिकल्स धुएं के रूप में माखुपुरा लोगों की श्वासों में घुल रहा है।


सुरेश भारती
अजमेर. माखुपुरा क्षेत्र के लोग श्वांस के जरिए प्रदूषण रूपी जहर निगल रहे हैं। इसके चलते अधिकतर लोग त्वचा, दमा व नेत्र रोग से पीडि़त हैं। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक करीब दस हजार की आबादी 75 फीसदी धुआं, डस्ट व दुर्गंध मिश्रित आक्सीजन लेने को मजबूर हैं।

हालात यह है कि प्रदूषण से गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य भी प्रभावित है। ऐसे में शिशु शारीरिक रूप से कमजोर पैदा हो रहे हैं। प्रदूषित वायुमंडल से विद्यार्थियों की जीवनचर्या बिगड़ गई। एक घंटे से अधिक समय पढ़ाई करते ही आंखों में जलन होने लगती है।

बच्चे चिड़चिड़े हो गए। ध्वनि प्रदूषण व अशुद्ध हवा से पशुओं की दुग्ध क्षमता कम हो गई। इस क्षेत्र के अस्सी फीसदी लोगों के फेफड़े खराब हो गए। हवा में करीब दो सौ प्रतिशत सेअधिक माइक्रोंस है जो कि सामान्य ५० फीसदी से चौगुना है। प्रदूषण के चलते माखुपुरा के वाशिंदे नेत्र रोगी होने लगे हैं।

क्या है वजह

- माखुपुरा की मुख्य आबादी से सटे औद्योगिक क्षेत्र से कारखाने जहरीला धुआं उगल रहे हैं। इसमें पत्थर घिसाई, लोहा ढलाई, टायर रिवाइंड व खाद्य तेल सहित अन्य फैक्ट्रियां शामिल है।

- नगर निगम के ट्रेचिंग ग्राउंड की दुर्गंध माखुपुरा निवासियों के लिए ‘धीमे जहर ’ से कम नहीं है। यहां कचरा जलाने पर मिथेन व हाइड्रोजन सल्फाइड मिश्रित धुआं सेहत के लिए खतरनाक है। नगर निगम के ट्रैक्टर २८, डम्पर ३ तथा अन्य वाहन ६ राउंड के जरिए पूरे अजमेर शहर का कचरा निस्तारण कर रहे हैं।

- दूसरी ओर अवैध खनन और क्रेशर मशीनों के जरिए हवा में डस्ट की मात्रा बढ़ रही है। माखुपुरा से सटे खनन क्षेत्र में कई जगह लीज के अलावा कृषि भूमि में अवैध खनन की शिकायतें हैं। यहां से उडऩे वाली डस्ट लोगों की सेहत बिगाड़ रही है।

- माखुपुरा की मुख्य आबादी के बीच से प्रमुख मार्ग स्थित है। यहां से चौबीस घंटे में करीब १० हजार से अधिक भारी व हल्के वाहन गुजर रहे हैं। जो नसीराबाद,भीलवाड़ा, सरवाड़, केकड़ी, सावर, देवली, बूंदी, कोटा, झालावाड़, बारां, इंदौर व भोपाल सहित कई शहरों से आवाजाही कर रहे हैं। वाहनों का शोरगुल, धुआं व धूलकण माखुपुरा के लोगों की सेहत बिगाड़ रहे हैं।

क्या है समाधान

-माखुपुरा के वाशिंदों का कहना है कि आबादी से सटे औद्योगिक क्षेत्र को पालरा में शिफ्ट किया जाए।

- रीको की लीज के अतिरिक्त ७० फीसदी कृषि भूमि पर कई कारखाने व आवासीय कॉलोनियां बन गई, जो कि अवैध है। यह आबादी में शामिल नहीं है। क्षेत्रवासी करण सिंह रावत का सुझाव है कि इन सभी को कानूनी रूप से हटाया जाए।

-ट्रेचिंग ग्राउंड में बायोमेट्रिक खाद का प्लांट स्थापित किया जाए जो भूमिगत हो। इसी प्रकार मृत मवेशियों के निस्तारण की जगह पर ऊंची चारदीवारी बनाई जाए। कचरे को जलाने पर पूर्ण पाबंदी लगे।

-माखुपुरा बस्ती के बीच से मुख्य मार्ग को बंद कर इसे पालरा से बीर चौराहा पर सीधा हाइवे निकाला जाए। इससे माखुपुरा क्षेत्र से वाहनों की आवाजाही सत्तर फीसदी कम होने पर लोगों को प्रदूषण से मुक्ति मिल सकेगी।