
law college ajmer
अजमेर
लॉ कॉलेज को तीन साल की एकमुश्त सम्बद्धता इस बार भी मिलती नहीं दिख रही। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने एकेडेमिक कौंसिल में प्रस्ताव पारित कर दिया है। लेकिन विश्वविद्याल प्रशासन कॉलेज को दो चरणों में तीन साल की सम्बद्धता देने का पक्षधर है।
महर्षि दयानंद सरस्वती सहित सभी विश्वविद्यालय लॉ कॉलेज को एक वर्ष की सम्बद्धता देते हैं। सरकार के रिपोर्ट भेजने में विलम्ब और अन्य कारणों से बार कौंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई)और कॉलेजों को दिक्कतें होती हैं। कौंसिल ने सभी विश्वविद्यालयों को पत्र भेजकर सभी कॉलेज को तीन साल की सम्बद्धता देेने को कहा था। डेढ़ साल से यह मामला अटका हुआ है। हाल में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने एकेडेमिक कौंसिल की बैठक में लॉ कॉलेज को तीन साल की सम्बद्धता देने का प्रस्ताव पारित किया है।
भेजा पत्र और 7.40 लाख रुपए
उच्च शिक्षा विभाग ने पिछले साल अजमेर के लॉ कॉलेज को तीन साल की एकमुश्ता सम्बद्धता के लिए 7.40 लाख रुपए भेजे। कॉलेज ने फीस विश्वविद्यालय में जमा करा दी। साथ ही उसने विश्वविद्यालय से सत्र 2018-19, 2019-2020 और 2020-2021 की एकमुश्त सम्बद्धता देने का पत्र भी भेजा है।
एकमुश्त सम्बद्धता मुश्किल
विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार में अजमेर, नागौर, भीलवाड़ा और टोंक जिले के लॉ कॉलेज हैं। विश्वविद्यालय तीन साल की एकमुश्त सम्बद्धता देने का पक्षधर नहीं है। अधिकृत सूत्रों ने बताया कि लॉ कॉलेज को पहले सत्र 2018-19 की सम्बद्धता मिलेगी। इसके बाद सत्र 2019-20 और 2020-21 की सम्बद्धता एकसाथ प्रदान की जाएगी। इससे पहले प्रबंध मंडल में यह मुद्दा रखा जाएगा। विश्वविद्यालय की पुरानी परम्परा को देखते हुए इस पर अड़चनें लगनी तय है।
विद्यार्थियों से नहीं सरोकार
विश्वविद्यालय को विद्यार्थियों से कोई सरोकार नहीं है। उसका अपना एलएलम कोर्स बदहाल है। यहां कोई स्थाई टीचर नहीं है। फिर भी लॉ कॉलेज के मामले में प्रशासन बार-बार अड़ंगे लगा रहा है।
फैक्ट फाइल
राज्य में सरकारी लॉ कॉलेज : 15
स्थापना : 2005-06
स्थायी मान्यता: किसी कॉलेज को नहीं
विद्यार्थियों की संख्या-करीब 15 हजार
सरकार से अनुदान : कुछ नहीं
Published on:
14 Jun 2018 07:20 am
