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अजमेर शहर की इस हवेली के मुख्यद्वार पर कभी लगता था 15 किलो का ताला
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अजमेर शहर की इस हवेली के मुख्यद्वार पर कभी लगता था 15 किलो का ताला

शहर में आज भी अंग्रेजों के जमाने की कई हवेलियां अपने गौरवपूर्ण इतिहास को बयां कर रही हैं। इन्हीं में से एक है कड़क्का चौक स्थित ढड्ढों की हवेली। इसके मुख्यद्वार और झरोखों के पत्थरों की कारीगरी आज भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेती है।
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अजमेर

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Jai Makhija

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Updated: 12 Jul 2019, 8:20 PM IST

अजमेर. शहर में आज भी अंग्रेजों के जमाने की कई हवेलियां अपने गौरवपूर्ण इतिहास को बयां कर रही हैं। इन्हीं में से एक है कड़क्का चौक स्थित ढड्ढों की हवेली। इसके मुख्यद्वार और झरोखों के पत्थरों की कारीगरी आज भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेती है। किसी जमाने में हवेली के मुख्यद्वार पर 15 किलो का ताला लगाया जाता था।

बड़ी चाबी वाले इस ताले (heritage lock )को दो से तीन लोग उठाते थे। 180 साल पुराने इस ताले को ढड्ढा परिवार के सदस्यों ने आज भी संजोकर रखा है। परिवार की सातवीं पीढ़ी के दिवंगत प्रकाशमल ढड्ढा की पत्नी कुमुद ने बताया कि हवेली के पुराने स्वरूप को आज भी कायम रखने का प्रयास किया जा रहा है।

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