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लोगों के सहयोग से सुधर सकता है कचरा प्रबंधन

कार्यशाला : एसएलआरएम परियोजना के संसाधन व्यक्ति सी श्रीनिवासन ने कहा सड़कों पर जगह-जगह नजर आने वाले कचरा डिपो से शहर की सुंदरता प्रभावित होती है। इनसे मच्छर, मक्खी भी पनपते हैं। सेहत पर भी विपरीत असर पड़ता है। यह बात एसएलआरएम परियोजना के संसाधन व्यक्ति सी श्रीनिवासन ने बुधवार को जवाहर रंगमंच पर आयोजित गाबेर्ज टू गोल्ड कार्यशाला में कही।

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अजमेर

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Dilip Sharma

Nov 10, 2022

Single use plastic ban, pollution control board formed a team of three officers, will investigate

‘सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में सिंगल यूज प्लास्टिक उत्पादों पर प्रतिबंध’

अजमेर. सड़कों पर जगह-जगह नजर आने वाले कचरा डिपो से शहर की सुंदरता प्रभावित होती है। इनसे मच्छर, मक्खी भी पनपते हैं। सेहत पर भी विपरीत असर पड़ता है। यह बात एसएलआरएम परियोजना के संसाधन व्यक्ति सी श्रीनिवासन ने बुधवार को जवाहर रंगमंच पर आयोजित गाबेर्ज टू गोल्ड कार्यशाला में कही। उन्होंने कहा कि लोग घर पर ही गीला व सूखा कचरा एकत्र कर लें और निगम के वाहनों में डालने से काम आसान हो सकता है। उन्होंने तमिलनाडु के वेल्लूर और छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर में चल रहे एसएलआरएम कार्यों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इन कार्यों की सफलता के लिए आमजन का सहयोग जरूरी है।नगर निगम आयुक्त सुशील कुमार ने कहा कि निगम की ओर से कचरा निस्तारण के लिए कई कार्य किए जा रहे हैं। इसमें लोगों का सहयोग मिले तो सभी का लाभ होगा। इस दौरान महापौर बृजलता हाड़ा, संभागीय आयुक्त बीएल मेहरा, स्मार्ट सिटी के एसई अरविन्द अजमेरा, एईएन बबीता सिंह, एचओ रूपाराम चौधरी, एसआई कैलाश मुंडेल व मनीष शर्मा, आरआई जयश्री बारहेठ, गौरव शर्मा आदि ने व्यवस्थाएं संभालीं।

इनकी जागरूकता बनी मिसाल. . .
अजमेर. शादियों में जाने पर अक्सर हर आइटम के लिए अलग डिस्पोजल बॉउल, दोना व मिनी प्लेट आदि ली जाती है। जिससे सैकड़ों किलो कचरा एकत्र हो जाता है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सैकड़ों शादियों में शरीक हो चुके हैं। लेकिन हर फंक्शन में सिर्फ एक अदद प्लेट का ही उपयोग कर किसी तरह के डिस्पोजल आइटम को काम में नहीं लेते। लोक अदालत के प्री-काउन्सलर और सेवानिवृत आरएएस अधिकारी सुरेश सिंधी की यह आदत अब तो उनका संस्कार बन चुकी है।

वे बताते हैं कि शादियों में हर आइटम के लिए अलग-अलग पात्र लेना कई क्विंटल कचरा बढ़ा देता है। इसे जागरूकता से कम किया जा सकता है।उन्होंने बताया कि अधिकारी होने के कारण संपर्क बढ़ा तो निमंत्रण भी खूब आते हैं। लेकिन शादी में जाने पर केवल एक प्लेट लेकर उसी में खाद्य पदार्थ लेते हैं।

खुद बंद करते हैं लाइटसुरेश सिंधी वर्तमान में राजस्व मंडल में लोक अदालत के लिए प्री काउन्सलर हैं। वे सुबह ऑफिस आने पर स्वयं ही रूम की लाइट जलाते हैं और घर जाते वक्त लाइट-पंखे स्वयं ही बंद करते हैं। स्टाफ को हिदायत है कि जब कोई कमरे में नहीं हो तो लाइट पंखे बंद रखें। जेब में कपड़े का थैला लेकर चलते हैं।