weather watch: रुक-रुक कर बरसते रहे भादौ के बादल, मौसम में हुई ठंडक

weather watch: रुक-रुक कर बरसते रहे भादौ के बादल, मौसम में हुई ठंडक

raktim tiwari | Publish: Sep, 10 2018 07:19:00 AM (IST) Ajmer, Rajasthan, India

www.patrika.com/rajasthan-news

अजमेर.

भादौ की घटाओं ने सोमवार को भी बौछारें छोड़ी। रुक-रुक कर बरसात होती रही। बारिश और बादल छाए रहने से मौसम में ठंडक रही। जाते मानसून में इंद्रदेव की मेहरबानी हुई।

शनिवार और रविवार को तरबतर करने वाली घटाओं ने सोमवार को भी बौछारें छोडऩा जारी रखा। कहीं तेज तो कहीं फुहारें पड़ी। कई क्षेत्रों में सडक़ों-नालों में पानी बहता रहा। अल सुबह से हल्की टपका-टपकी का दौर चला। वैशाली नगर, शांतिपुरा, आनसागर लिंक रोड और आसपास के इलाकों में भी फुहारें गिरी। इससे सडक़ें गीली हो गई। जिले के कायड़, लोहागल रोड, घूघरा घाटी, जयपुर रोड, सिविल लाइंस सहित अन्य इलाकों में भी बीते दिनों में झमाझम बरसात हुई।

सडक़ों पर भरा पानी
शनिवार रात और रविवार को हुई बरसात से कई जगह सडक़ों पर पानी भरा नजर आया। जयपुर रोड पर भूणाबाय, राजस्थान लोक सेवा आयोग के आसपास सडक़ पर तरणताल बन गया। यही हाल पुलिस लाइन, सिविल लाइन्स रोड पर दिखा। इसके अलावा नालों और नालियों से उफतना पानी भी सडक़ों पर भर गया। शहर के फायसागर रोड, माकड़वाली रोड और अन्य इलाकों में तेज फुहारें ही पड़ी। कुछेक क्षेत्रों में रुक-रुक कर टपका-टपकी हुई।

कौशल शिक्षा और तकनीकी ज्ञान बहुत जरूरी

कौशल शिक्षा और तकनीकी ज्ञान बहुत जरूरी है। इसके बिना शैक्षिक उन्नयन संभव नहीं है। लेकिन अध्ययन- अध्यापन में नवाचार, शोध अभिरुचि और समयानुकूल बदलाव भी होने चाहिए। यह बात उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी ने महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में कही।

नवनिर्मित अमृतायन भवन के लोकार्पण और राजस्थान विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) के सेमिनार में बोलते हुए उन्होंने कहा कि उच्च एवं तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में नए नवाचार होते रहने चाहिए। प्रतिस्पर्धात्मक दौर और वैश्विक परिदृश्य में भारतीय विद्यार्थी तभी टिकेंगे जबकि शैक्षिक गुणवत्ता उच्च स्तरीय होगी। पढऩे-पढ़ाने के तौर-तरीकों में भी समयानुकूल परिवर्तन जरूरी हैं। लेकिन हमें शैक्षिक मूल्यों, देश-प्रदेश की आवश्यकता और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी समझना होगा। अंतिम छोर तक उच्च शिक्षा तभी पहुंचेगी जबकि शिक्षण को सामुदायिक विकास से जोड़ा जाएगा।

केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा के कुलाधिपति डॉ. पी. एल. चतुर्वेदी ने कहा कि बंीते कई वर्षों में उच्च शिक्षा में प्रयोग ज्यादा हुए हैं। शिक्षा को प्रायोगशाला बनाया जाना अव्यवहारिक है। ब्रिटिशकाल में भारत के स्थापित मूल्यों, शिक्षा पद्धति को सर्वाधिक नुकसान पहुंचाया गया। बाद के वर्षों में भी तात्कालिक बदलाव हुए पर काफी हद तक वे सामान्य रहे। बीते 10-15 साल में तो शैक्षिक मूल्य और मायने बिल्कुल बदल गए हैं।

 

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