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जा़लिम के विरुद्ध खड़े होना भी जिहाद: कल्बे सादिक

 प्रमुख धार्मिक विद्वान डॉ. मौलाना कल्बे सादिक ने कहा कि जुल्म सहना पाप है। 

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Bhanu Pratap Singh

Dec 14, 2016

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अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शिया धर्मशास्त्र विभाग द्वारा “हजरत इमाम हुसैन मानवता के रखवाले” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित करते हुए प्रमुख धार्मिक विद्वान डॉ. मौलाना कल्बे सादिक ने कहा कि जुल्म सहना पाप है। यही कारण था कि हजरत इमाम हुसैन ने यजी़द के साथ कोई भी समझौता नहीं किया और उसका मुकाबला किया।

कर्बला की घटना से सबसे बड़ी सीख
उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन का कहना था कि जा़लिम के विरुद्ध खड़ा होना भी एक जिहाद है। डॉ. कल्बे सादिक ने कहा कि कर्बला की घटना से सबसे बड़ी सीख यह मिलती है कि हमें जो जीवन अल्लाह ने दिया है उसको हम अल्लाह के बताये मार्ग के मुताबिक गुजारें। भले ही उसके लिए शहादत भी क्यों न देनी पड़े। उन्होंने कहा कि तमाम धर्म मानवता का संदेश देते हैं और इस्लाम धर्म में भी मानवता पर बहुत बल दिया गया है और यही हजरत इमाम हुसैन का संदेश था।

इस्लाम के बताये मार्ग पर चल कर शांति व सौहार्द के लिए कार्य
कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल जमीर उद्दीन शाह ने कहा कि बड़ी संख्या में विभिन्न धर्मों के विद्वानों का एएमयू में एक साथ इकट्ठा होना इस बात का प्रतीक है कि यह संस्था मानवीय मूल्यों के प्रति पूरी तरह से समर्पित है। जनरल शाह ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने वह 14 सौ वर्ष पूर्व थे।


जंग नहीं चाहते थे हजरत इमाम हुसैन
सहकुलपति ब्रिगेडिसर एस अहमद अली ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन यजीद से जंग नही चाहते थे। लेकिन यजीद ने उन पर जंग थोपी जिसमें हजरत इमाम हुसैन व उनके साथियों व परिजनों की शहादत भी हुई। सहकुलपति ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन चाहते थे कि यजीद इस्लाम के बताये मार्ग पर चल कर शांति व सौहार्द के लिए कार्य करे। उन्होंने बताया कि हजरत इमाम हुसैन मदीना से मक्का और फिर ईराक सत्यता का संदेश लेकर गये और इससे हमें सबक लेना चाहिए।

झूठ व सच के बीच फर्क करना सीखा
थ्योलोजी विभाग के चेयरमैन प्रो. अली मुहम्मद नक्वी ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन की शहादत के कारण लोगों के झूठ व सच के बीच फर्क करना सीखा और उनकी शहादत से समाज में नये मूल्य स्थापित हुए। उन्होंने कहा कि अगर इमाम हुसैन की शहादत नहीं होती तो आज दुनियॉ इस बात को नहीं समझ पाती कि अपना बलिदान देकर जालिम से कैसे लड़ा जा सकता है।


हजरत इमाम हुसैन के पदचिन्हों पर चलना होगा
आध्यात्मिक गुरु स्वामी स्वतंत्रानंद ने महात्मा गांधी की उद्धृत करते हुए कहा कि भारत को एक सफल राष्ट्र बनने के लिए हजरत इमाम हुसैन के पदचिन्हों पर चलना होगा। उन्होंने इस बारे में रविन्द्रनाथ टैगौर का हवाला देते हुए कहा कि उनका कहना था कि न्याय और सत्य को जीवित रखने के लिए हमें वहीं करना होगा जो हजरत इमाम हुसैन ने किया।

सच्चाई और ईमान का रास्ता नहीं छोड़ें
जत्थेदार अकाल तख्त ज्ञानी गुररुबचन सिंह ने कहा कि इमाम हुसैन ने दुनियॉ को यह दिखाया कि सच्चाई के लिए युद्व लड़ना भी कोई मायने नहीं रखता। झारंखण्ड व आसाम के पूर्व राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी ने कहा कि इमाम हुसैन ने यजीद के प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा था कि वह अपने आपको न तो उसके हवाले करेंगे और नहीं भाग कर कहीं और जाएंगे। वह सच्चाई और ईमान का रास्ता नहीं छोड़ें।


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जालिम शासक के खिलाफ खड़े थे
सुन्नी धर्म शास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. तौकीर आलम फलाही ने कहा कि इमाम हुसैन का धैर्य केवल कर्बला तक सीमित नहीं था बल्कि उसका पैमाना यह भी था कि वह एक जालिम शासक के खिलाफ खड़े थे जो ईमान के रास्ते से भटक गया था। प्रो. सऊद आलम कासमी ने बताया कि हजरत इमाम हुसैन जन्नत में नौजवानों का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन को कभी सत्ता का लालच नहीं रहा, बल्कि वह दीन को कायम करना चाहते थे। प्रो. कासमी ने कहा कि उनके बलिदान से बड़ा विश्व का कोई अन्य बलिदान नहीं है।

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