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योगा और नमाज़ अल्जाइमर से बचाव में सहायक !

meiबुजुर्गों को डिमेंशिया से बचाने के लिए युवाओं को करना चाहिए यह काम

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अलीगढ़। डिमेंशिया एक भूलने की बीमारी है। जिसमें 60 से 70 प्रतिशत अल्जाइमर प्रकार की डिमेंशिया होती है। यह रोग बुजुर्गों में अधिक पाया जाता है और बढ़ती बुजुर्गों की संख्या के कारण इसका दवाब बढ़ता जा रहा है। अतः इसके लिए जागरूकता प्रत्येक स्तर पर हो इसी प्रयास में टी एण्ड टाॅक का महत्व और बढ़ जाता है। ये बातें अल्जा़इमर्स दिवस के अवसर पर मानसिक रोग विशेषज्ञ डाॅ. एसए आज़मी ने मेडीकल काॅलोनी में टी एण्ड टाॅक प्रोग्राम के दौरान कही। बायोकैमिस्ट्री विभाग के प्रो. कय्यूम हुसैन ने कहा कि बुजुर्गों को अकेलेपन से बचाने के लिये सरकारी एवं गैर सरकारी स्तर पर प्रयास करने की जरूरत है। इसके लिए लोगों को कीमती समय में से कुछ समय निकाल कर बुजुर्गों की सेवा में लगाना चाहिए।

इंटरडिसिप्लीनरी बायोटेक्नालोजी यूनिट के कोआर्डिनेटर प्रो. रिज़वान खाॅन ने कहा कि उनकी देखरेख में अल्जाइमर पर शोध हो रहा है। योगा एवं नमाज़ अल्जाइमर के बचाव में मददगार हो सकते हैं क्योंकि दोनों एकाग्रता एवं तनाव प्रबन्धन में भी सहायता करते हैं। पाॅलीटैक्निक के प्रो. तुफैल अहमद ने कहा कि खाने की वस्तुओं में मिलावट का अल्जाइमर से सम्बन्ध पर वृहद शोध होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि संतुलित आहार बचाव के लिए जरूरी है। प्रो. राशिद उमर ने कहा कि नियमित व्यायाम एवं संतुलित जीवन लाभ कारी होता है। धातु तत्वों का भोजन-पानी में असंतुलन और अल्जाइमर के सम्बन्ध पर गहन अध्ययन एवं शोध की जरूरत है।

प्रो. इकबाल अहमद ने कहा कि शोध से कुछ ऐसी चीजों का पता लगाना चाहिए जिससे अल्जाइमर का जल्दी पता लगाया जा सके। उन्होंने फ्रांस के एक शोध का हवाला देते हुए बताया कि एरोमा थेरेपी (सुगंध) एवं हर्बल मेडीसन और अल्जाइमर पर शोध जरूरी है।

इस दौरान अलीगढ़ के गृहकर अधीक्षक एसपी यादव ने कहा कि बुजुर्गों की पारिवारिक एवं सामाजिक सुरक्षा अनिवार्य हो। ताकि बुजुर्ग अपने आप को सुरक्षित समझें। अलीगढ़ जलकल के महाप्रबन्धक एसके पाठक ने कहा कि भारतीय संस्कृति में बुजुर्गों का सम्मान एवं सेवा सर्वोपरि है। अन्त में टी एण्ड टाॅक प्रोग्राम की अध्यक्षता कर रहे दर्शन शास्त्र विभाग के प्रो. मोहम्मद मुकीम ने प्रोग्राम की सराहना करते हुए कहा कि अल्जाइमर की जागरूकता के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम लाभकारी होते हैं। सही पोषण, शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं बौद्धिक रूप से स्वस्थ्य एवं सक्षमता तथा प्रदूषण से बचाने के लिए सरकारी एवं गैर सरकारी स्तर से प्रयास जरूरी हैं।