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मातृत्व अवकाश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला, दो साल के गैप की कोई बंदिश नहीं

Allahabad High Court decision मातृत्व अवकाश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहाकि, किसी महिला कर्मचारी को दो साल की अवधि के भीतर दो मातृत्व अवकाश का लाभ न देना अवैधानिक है।

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Allahabad High Court ने सभी अंतरिम आदेशों को 31 मई तक बढ़ाने का लिया फैसला

Allahabad High Court ने सभी अंतरिम आदेशों को 31 मई तक बढ़ाने का लिया फैसला

मातृत्व अवकाश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहाकि, किसी महिला कर्मचारी को दो साल की अवधि के भीतर दो मातृत्व अवकाश का लाभ न देना अवैधानिक है। कोर्ट ने कहाकि, मातृत्व लाभ अधिनियम में ऐसी कोई बंदिश नहीं है कि दो साल के बाद ही मातृत्व अवकाश का लाभ दिया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि यह लाभ दो साल के भीतर भी दिया जा सकता है। तो हाईकोर्ट के इस फैसले से यह और पक्का हो गया है कि, अब दो साल में दो मातृत्व अवकाश लिया जा सकता है। इस आदेश के साथ हाईकोर्ट ने फिरोजाबाद बेसिक शिक्षा अधिकारी के दो साल के भीतर मातृत्व अवकाश देने से इनकार करने के आदेश को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि, याची को दूसरे मातृत्व अवकाश का लाभ दिया जाए। इसके दौरान उसे वेतन सहित अन्य लाभ भी प्रदान किए जाएं।

आवेदन को बीएसए ने निरस्त किया था

यह आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सिद्धार्थ की सिंगल बेंच ने फिरोजाबाद के उच्च प्राथमिक विद्यालय नगला बालू में तैनात सहायक अध्यापिका सुनीता यादव की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। मामला यह है कि याची ने 2020 में 180 दिनों का वैतनिक मातृत्व अवकाश लिया था, जिसके बाद याची ने दूसरे मातृत्व अवकाश के लिए मई 2022 में बीएसए फिरोजाबाद को आवेदन किया था। बीएसए ने याची के आवेदन को इस आधार पर निरस्त कर दिया कि दो मातृत्व अवकाशों के मध्य दो साल का अंतराल जरूरी है।

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हाईकोर्ट ने रद किया बीएसए का आदेश

याची सुनीता यादव ने बीएसए के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने बीएसए के आदेश को रद्द करते हुए याची को 180 दिनों का वैतनिक मातृत्व अवकाश देने का आदेश दिया।

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