इलाहाबद हाईकोर्ट ने हिंदू महिला को मुस्लिम पति से मिलवाया, कहा महिलाओं को अपनी शर्तों पर जीने का हक

कोर्ट ने महिला के पति के खिलाफ दायर अपहरण के एफआईआर को भी खारिज कर दिया

पत्रिका उत्तर प्रदेश

प्रयागराज. उत्तर प्रदेश में लव कथित लव जेहाद की चर्चा के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर प्रेमी जोड़ों की हिफाजत की है। हाईकोर्ट ने एक हिंदू युवती को उसके मुस्लिम पति से मिलवाते (Hindu Girl Live Their Muslim Husband) हुए कहा है कि महिला को अपना जीवन अपनी शर्तों पर जीने का अधिकार (women have right to live on own terms) है। कोर्ट ने कहा है कि अगर वह अपने पति के साथ रहना चाहती है तो वह किसी रुकावट के बिना इसके लिये आजाद है। कोर्ट ने महिला के पति के खिलाफ दायर अपहरण के एफआईआर को भी खारिज कर दिया।

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युवती के पति की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश जस्टिस पंकज नकवी और जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच ने दिया। अपनी याचिका में उसके पति ने कहा था कि नारी निकेतन या चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने उसकी पत्नी की मर्जी के खिलाफ उसे उसके माता-पिता के पास भेज दिया है।

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इस मामले में कोर्ट ने बीते 16 दिसंबर को पुलिस को 18 दिसंबर को युवती को पेश करने को कहा था। कोर्ट में पेश महिला के बयान को सुनने के बाद बेंच ने पाया कि महिला अपने पति के साथ ही रहना चाहती है। कोेर्ट ने कहा कि महिला बालिग है और उसे अपनी शर्तों पर जीने का पूरा अधिकार है। महिला अगर अपने पति के साथ रहना चाहती है तो वह बिना किसी तीसरे पक्ष के प्रतिबंध या रुकावट के अपनी मर्जी से उसके पास जाने के लिये आजाद है।

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कोर्ट ने मुख्य न्यायिक मजिसट्रेट द्वारा महिला केा नारी निकेतन भेजे जाने के आदेश केा गलत ठहराते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट, सीडब्ल्यूसी एटा ने इस मामले में कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया। कोर्ट का कहना था कि महिला की डेट ऑफ बर्थ 4 अक्टूबर 1999 है, यानि कि वह बालिग है। हालांकि ट्रायल कोर्ट ने इस प्रावधान का पालन नहीं किया कि किसी का स्कूल सर्टिफिकेट दिखा दिये जाने के बाद कोई भी सबूत उतने मायने नहीं रखते। महिला के पति पर लगा अपहरण का आरोप भी हट गया। कोर्ट ने एफआईआर को खारिज कर दिया।

रफतउद्दीन फरीद
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