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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिकृत भूमि मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच का दिया निर्देश

कोर्ट ने कहा कि जिस अधिकारी ने स्कूल को मान्यता दी थी,उसका पता लगाकर जवाबदेह अधिकारी पर ऐक्शन हो। कोर्ट ने अधिग्रहण की वैधता चुनौती याचिका पर हस्तक्षेप करने से भी इंकार कर दिया है और याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल तथा न्यायमूर्ति जे जे मुनीर की खंडपीठ ने मनोज व अन्य की याचिका पर दिया है।
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प्रयागराज

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Sumit Yadav

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Updated: 30 May 2022, 11:13 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिकृत भूमि मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच का दिया निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिकृत भूमि मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच का दिया निर्देश

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सचिव बेसिक शिक्षा उ प्र लखनऊ को ग्रेटर नोएडा गौतमबुद्धनगर द्वारा अधिगृहीत भूमि पर स्कूल की मान्यता देने की जांच कराकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जिस अधिकारी ने स्कूल को मान्यता दी थी,उसका पता लगाकर जवाबदेह अधिकारी पर ऐक्शन हो। कोर्ट ने अधिग्रहण की वैधता चुनौती याचिका पर हस्तक्षेप करने से भी इंकार कर दिया है और याचिका खारिज कर दी है।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल तथा न्यायमूर्ति जे जे मुनीर की खंडपीठ ने मनोज व अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की तरफ से अधिवक्ता अंजली उपाध्याय ने प्रतिवाद किया। याची का कहना था कि उसकी जमीन के आसपास आबादी की जमीन है।जिसे अधिगृहीत नहीं किया गया और याची की जमीन अधिग्रहीत कर भेदभाव किया गया है।

प्राधिकरण की तरफ से कहा गया कि अधिग्रहण 2005-6मे किया गया था। स्कूल का निर्माण बाद में 2012मे किया गया और 2016मे स्कूल को मान्यता दी गई। अधिग्रहण के समय याची की 250वर्गमीटर जमीन पर निर्माण था।उसका अधिग्रहण नहीं किया गया।शेष जमीन 0.800हेक्टेयर खाली थी।उसका अधिग्रहण किया गया है।स्कूल अवैध रूप से अधिगृहीत भूमि पर कब्जा कर बनाया गया है।

यह भी पढ़ें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट को लेकर की टिप्पणी, कहा- केवल धारा 14A(1) के तहत अपील सुनवाई योग्य न्यायालय के समक्ष मौजूदा मामले में 482 सीआरपीसी के तहत एक आवेदन दायर किया गया था, जिसमें द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश, एससी/एसटी अधिनियम, लखीमपुर खीरी द्वारा धारा 323/504/506 आईपीसी और एससी/एसटी अधिनियम के 3(1) के तहत अपराध के लिए आवेदक के खिलाफ पारित समन आदेश को रद्द करने की प्रार्थना की गई थी।

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