3 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इलाहाबाद हाईकोर्ट : वादियों पर समझौता का झूठा दावा करने पर 1 लाख रुपए का जुर्माना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी उमेश यादव को शिकायतकर्ता की बेटी से शादी करनी थी, जिसके अनुसरण में, पूर्व-विवाह समारोह का खर्च शिकायतकर्ता द्वारा वहन किया गया था। जब शिकायतकर्ता ने तिलक समारोह की तारीख तय करने के लिए आरोपियों से संपर्क किया, तो उन्होंने 5,00,000 रुपये नकद, एक मोटरसाइकिल और एक सोने की चेन की मांग की।

2 min read
Google source verification
इलाहाबाद हाईकोर्ट : वादियों पर समझौता का झूठा दावा करने पर 1 लाख रुपए का जुर्माना

इलाहाबाद हाईकोर्ट : वादियों पर समझौता का झूठा दावा करने पर 1 लाख रुपए का जुर्माना

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अदालतें पक्षकारों के बीच न्याय प्रदान करने के लिए होती हैं यहां पर आने वाले व्यक्ति को साफ मन से आना चाहिए। इसके साथ किसी भी तरह से झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए। मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय कुमार सिंह की एकल-न्यायाधीश पीठ ने भारतीय दंड संहिता की धारा 406 और दहेज निषेध अधिनियम की धारा 6 के तहत संपूर्ण आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत दायर आवेदन को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी उमेश यादव को शिकायतकर्ता की बेटी से शादी करनी थी, जिसके अनुसरण में, पूर्व-विवाह समारोह का खर्च शिकायतकर्ता द्वारा वहन किया गया था। जब शिकायतकर्ता ने तिलक समारोह की तारीख तय करने के लिए आरोपियों से संपर्क किया, तो उन्होंने 5,00,000 रुपये नकद, एक मोटरसाइकिल और एक सोने की चेन की मांग की। नतीजतन, शिकायतकर्ता ने दहेज निषेध अधिनियम 3 और 4 और आईपीसी की धारा 504, 506 के तहत आरोपी-आवेदकों के खिलाफ पहली सूचना रिपोर्ट दर्ज की।

यह भी पढ़ें: शादी के पहले महिला ने होने वाले पति पर लगाया बलात्कार का झूठा आरोप, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाया 10 हजार का जुर्माना

मामले में जांच के बाद, मजिस्ट्रेट ने आवेदकों को मुकदमे का सामना करने के लिए बुलाया। आरोपी-आवेदकों को तलब करने के मजिस्ट्रेट के आदेश से व्यथित और असंतुष्ट आवेदकों ने धारा 482 के तहत एक आवेदन के माध्यम से इसे चुनौती दी, जिसका निपटारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय की समन्वय पीठ द्वारा किया गया था।

इस आदेश के अनुसरण में, आवेदकों ने संबंधित अदालत के समक्ष आवेदन दिया, जो अभी भी लंबित बताया गया था। हालांकि, आवेदकों ने इस प्रार्थना के साथ एक दूसरा आवेदन दायर किया कि पार्टियों के बीच हुए समझौते के आधार पर शिकायत मामले की पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया जाए।