
माघ मेला में दिखेगी 2 करोड़ की नाव, जमीन और पानी दोनों पर चलने की है क्षमता (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
Magh Mela 2026: मेला क्षेत्र में स्नानार्थियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने इस बार तकनीक आधारित विशेष इंतजाम किए हैं। इसी बीच एक नाव का वीडियो तेली से वायरल हो रहा है, जो जमीन और पानी दोनों पर चल रही है। दावा किया जा रहा है कि भीड़ और जल क्षेत्र में संभावित हादसों को ध्यान में रखते हुए इस विशेष नाव को सुरक्षा ड्यूटी में तैनात किया गया है। इसका उपयोग स्नान के दौरान भीड़ नियंत्रण, डूबते श्रद्धालुओं को बचाने और आपात स्थिति में त्वरित रेस्क्यू के लिए किया जाएगा। यह नाव उथले पानी, दलदली किनारों और रेत वाले इलाकों में भी आसानी से मूव कर सकती है, जहां सामान्य नावें या मोटरबोट नहीं पहुंच पातीं। हालांकि, पत्रिका इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।
प्रशासन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, हर साल स्नान पर्व के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम और अन्य घाटों पर पहुंचते हैं। ऐसे में जल क्षेत्र में सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। इसी को देखते हुए आधुनिक तकनीक से लैस इस विशेष नाव को तैनात किया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत पहुंचाई जा सके। बताया जा रहा है कि यह नाव तेज गति से मूव करने में सक्षम है और इसमें रेस्क्यू उपकरण भी मौजूद हैं।
मेला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को इस बार व्यापक और बहुस्तरीय बनाया गया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे मेला परिसर में 17 थाने और 42 पुलिस चौकियां स्थापित की गई हैं। इसके साथ ही करीब 10 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, जो चौबीसों घंटे निगरानी और गश्त में जुटे रहेंगे।
स्नान घाटों की सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। यहां एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की प्रशिक्षित टीमें तैनात की गई हैं, जिनके साथ फ्लड कंपनी पीएसी और गोताखोर भी लगातार मुस्तैद रहेंगे। किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए साइबर थाना स्थापित किया गया है, वहीं महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सहायता के लिए अलग से महिला हेल्प डेस्क की व्यवस्था की गई है। साथ ही अग्निशमन विभाग, जल पुलिस, पीएसी, आरएएफ, एनडीआरएफ समेत अन्य एजेंसियां भी सक्रिय हैं। इस बार मेला क्षेत्र में आग लगने पर दो से तीन मिनट में घटनास्थल पर पहुंचने का रिस्पांस टाइम है।
माघ मेला के आयोजकों के अनुसार, यह नाव हाइब्रिड टेक्नोलॉजी से तैयार की गई है। नाव को पानी पर तैराने के लिए पारंपरिक फ्लोटेशन तकनीक का उपयोग किया गया है। इसके साथ ही, नाव के नीचे लगे विशेष ट्रैक और पहिए इसे सख्त जमीन पर चलने की क्षमता प्रदान करते हैं। नाव में सुरक्षित बैठने की व्यवस्था के लिए आधुनिक सीटिंग और हैंडलिंग सिस्टम लगाया गया है।यह नाव लगभग 20–25 यात्रियों को एक साथ ले जा सकती है, जिससे समूह में दर्शन करने वाले लोग आसानी से इसका लाभ उठा सकते हैं। जानकारों का कहना है कि यह नाव पर्यटन और धार्मिक आयोजन दोनों के दृष्टिकोण से अत्यंत उपयोगी साबित होगी। इसकी मदद से श्रद्धालु संगम तट और मेला क्षेत्र के अन्य हिस्सों को आसानी से देख सकते हैं, जबकि जमीन पर भी इसे उसी तरह संचालित किया जा सकता है।
Updated on:
03 Jan 2026 11:08 am
Published on:
03 Jan 2026 03:00 am
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